13 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूली बच्चों में तेजी से बढ़ रही डॉयबिटीज, पैरेंट्स इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

- कोरोना काल में 20 फीसदी तक बढ़े मधुमेह के रोगी, बच्चों में बढ़ रहा टाइप-1 डायबिटिज
3 min read
Google source verification
gettyimages-1044127432-170667a.jpg

Type 1 Diabetes in Children

लवीन ओव्हाल, इंदौर। कोरोना त्रासदी में न सिर्फ बड़ों का जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि बच्चे भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। कोरोना काल में हर वर्ग की सेहत पर असर पड़ा, वहीं कुछ बच्चों को डायबिटीज जैसी जटिल बीमारी का शिकार भी होना पड़ा। कई लोग कोरोना संक्रमण से भले ही बच गए, लेकिन उन्हें घर अन्य बीमारियों ने घेर लिया। इसमें सबसे अव्वल डायबिटीज रही है, जिनमें बड़े-बच्चे दोनों ही प्रभावित हुए हैं। हैं।

शहर में जहां कोरोना काल के दौरान डायबिटीज के रोगी 20 फीसदी बढ़े हैं। वहीं बच्चों में टाइप 1 डायबिटीज की बीमारी 2 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वैसे यह बीमारी वंशानुगत भी होती हैं। इसके अलावा बिगड़ी हुई जीवनशैली भी इसका खतरा बढ़ जाता है। कोरोना काल में उपचार के दौरान स्टेरॉइड के सेवन से भी मधुमेह के मरीजों में में इजाफा हुआ है।

डॉ. संदीप जुल्का ने बताया, कोरोनाकाल में डायबिटीज के मरीज इसलिए बढ़े क्योंकि महामारी के चलते जांच हुई। इस दौरान ब्लड में शुगर के स्तर का पता चला। लॉकडाउन, वर्क फ्रॉम होम और व्यायाम आदि के लिए घर से नहीं निकलने जैसे कारणों की वजह से लोगों का वजन बढ़ा। इससे डायबिटीज के रोगियों में बढ़ोतरी हुई है। लॉकडाउन और उसके बाद भी कई लोगों ने व्यायाम पर नहीं बल्कि भोजन पर ही ध्यान दिया। जिस वजह से उनका वजन बढ़ा। जिनके परिवार में पहले से किसी को मधुमेह था वे इसकी चपेट में जल्दी आ गए।

20 फीसदी तक बढ़े मरीज

डॉ. धर्मेंद्र झंवर ने बताया कोरोना काल में मधुमेह रोगियों की संख्या में 20% का इजाफा हुआ वायरस और एंटीबॉडी से बीटा सेल क्षतिग्रस्त हुए जिससे मधुमेह हुआ और यह समस्या हमेशा के लिए हो गई। इससे बच्चे भी मधुमेह की चपेट में आए क्योंकि अधिकाश को महामारी तो हुई पर उन्हें उसका पता नहीं चला।

स्कूल जाने की उम्र वाले हर 10 में से एक बच्चे को डायबिटीज

स्कूल जाने की उम्र वाले हर 10 बच्चों में से 1 को डायबिटीज की बीमारी है। 5 से 9 वर्ष के बच्चों और 10 से 19 वर्ष के किशोरों पर किए गए व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण (सीएनएनएस) 2016-18 के हाल ही में जारी हुए नतीजों में भी यह बात सामने आई है।

कम उम्र में डायबिटीज होने की वजह

रिपोर्ट के मुताबिक, खानपान और लाइफस्टाइल की वजह से बच्चों में ब्लड शुगर का लेवल सामान्य से अधिक पाया गया है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ाता है। ये खतरा डायबिटीज के इन सभी मामलों में लगभग 90% का है। भारतीय किशोरों की बात करें तो 2016 में 7.20 करोड़ बच्चों को डायबिटीज था, जो अब बढ़ गया है।

बच्चों में डायबिटीज के लक्षण

डॉ. संदीप जुल्का ने बताया, इसके बीमारी के कारण बच्चों का शुगर लेवल असामान्य रूप से बढ़ता जिसके कारण उन्हें बहुत ज्यादा प्यास लगती है, उनकी भूख बढ़ जाती है, बच्चे थके हुए व सुस्त रहने लगते हैं, बिना वजह शरीर कांपना वजन कम होना, धुंधला दिखाई देना वगैरह कई तरह की दिक्कतें आने लगती है।

इन बातों का भी रखें ध्यान

- समय पर ब्लड शुगर टेस्ट करवाते रहें और उसके हिसाब से इंसुलिन की मात्रा घटाते-बढ़ाते रहना चाहिए।

- पोषक तत्वों से भरपूर और समय पर खाना दें।

- रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शुगर, मिठाई, मैदे वाली सफेद

- रोटी, पेस्ट्री, सोडा और जंक फूड से बच्चों को दूर रखें।

- बच्चों को भरपूर पानी पीने के लिए कहें और उन्हें सोडा, जूस या स्क्वैश जैसी ड्रिंक से दूर रखें।

- बच्चे में नियमित व्यायाम करने की आदत डालें।