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बच्चों में फैल रही बाइक के नाम वाली यह गंभीर बीमारी, चेहरा-आंखें लाल हैं तो तुरंत हो जाएं सतर्क

बीमारी एलर्जी जैसी लगती है, लेकिन बच्चों के दिल पर प्रभाव डालती है

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इंदौर

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Amit Mandloi

Jul 09, 2018

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बच्चों में फैल रही बाइक के नाम वाली यह गंभीर बीमारी, चेहरा-आंखें लाल हैं तो तुरंत हो जाएं सतर्क

इंदौर. आपको याद होगा बजाज कंपनी ने कावासाकी बाइक लांच की थी, फिलहाल तो वह बाइक बंद भी हो गई है, लेकिन अब इसी नाम की एक बीमारी आ गई है जो बच्चों से संबंधित है। वह एलर्जी जैसी लगती है, लेकिन बच्चों के दिल पर प्रभाव डालती है। बच्चों की इस बीमारी को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

5 साल से कम उम्र के बच्चों में बुखार के साथ चेहरे, आंखों, जुबान और होंठों के लाल होने पर अक्सर पहली शंका किसी प्रकार की एलर्जी की होती है। इलाज भी सामान्य बीमारी की तरह होता है और उसमें कीमती वक्त गुजर जाता है जबकि यह लक्षण कावासाकी नामक गंभीर बीमारी के होते हैं। इस बीमारी में यही शुरुआती 10 दिनों में इलाज न मिले तो इसका असर हृदय की कोरोनरी आर्टरी पर हो सकता है, जिसके गंभीर परिणाम सामने आते हैं।

इसी विषय पर इंदौर में एक सेमिनार का आयोजन भी हुआ है। जहां डॉक्टरों ने कावासाकी संबंधित विचार व्यक्त किए। कनेक्टिव टिश्यू डिसीज पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के दौरान ब्रिलिएंट कन्वेंशन सेंटर में चंडीगढ़ पीजीआई हॉस्पिटल से आए डॉ. सुरजीत सिंह ने कहा कि इस बीमारी के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, हर एक लाख में से 5 बच्चों को यह बीमारी होती है। खास बात यह है कि इसके ज्यादातर केसेस अपर सोशल इकोनोमिकल सेगमेंट में देखे जा रहे हैं। यानि जीवनशैली में सुधार के साथ इस बीमारी की आशंका बढ़ती जाती है। इस बीमारी को 1961 में जापान के डॉ. कावासाकी ने डाइग्नोस किया था परन्तु तब से अब तक कोई भी इसके कारण की खोज नहीं कर पाया है।

लक्षणों को अनदेखा करना बड़ी भूल

रिह्यूमेटोलॉजिस्ट डॉ आशीष बाड़ीका ने बताया, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर के अंतर्गत कई तरह की बीमारियां होती हैं। इनमे लुपस, सेलेरोडेर्मा, रहूमटॉइड आर्थराइटिस, म्योसिटिस आम हैं। इन सभी बीमारियों में जोड़ों में दर्द या त्वचा में विभिन्न प्रकार के चकत्ते जैसे बाहरी लक्षण दिखाई देते हैं, जिसे आमतौर पर डॉक्टर और मरीज दोनों ही गंभीरतापूर्वक नहीं लेते, जबकि ये सभी बीमारियां बेहद गंभीर है और शरीर के अंदरूनी अंगों को धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त करती जाती है। सही समय पर इनकी पहचान होने पर ही सही इलाज मिलना संभव होता है। इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य इन्ही बीमारियों के प्रति जागरूकता लाना और इनकी नवीन चिकित्सा विधियों के बारे में डॉक्टर्स को जानकारी देना है।