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MP News- मकान तोडऩे के नोटिस से मचा हड़कंप, हाईकोर्ट से रहवासियों को बड़ी राहत

Indore- Ujjain नगर निगम ने दिया था नोटिस, जिस पर Indore हाईकोर्ट ने रोक लगा दी

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Relief from the Indore High Court regarding demolition notices for houses in Ujjain

Relief from the Indore High Court regarding demolition notices for houses in Ujjain फाइल फोटो पत्रिका

MP News- मध्यप्रदेश में ग्रीन बेल्ट में रह रहे लोगों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने रहवासियों के मकान तोडऩे पर अभी रोक लगा दी है। मामला उज्जैन का है जहां नगर निगम के नोटिस से हड़कंप मच गया था। यहां शिप्रा के ग्रीन बेल्ट पर रहने वालों के घर टूटने का खतरा उत्पन्न हो गया था। शिप्रा नदी के किनारे सिद्धसेन मार्ग के रहवासियों को हाईकोर्ट ने राहत दी है। उज्जैन नगर निगम द्वारा उनके मकान तोडऩे का नोटिस दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। जस्टिस प्रणय वर्मा की कोर्ट ने आदेश जारी किया है कि नगर निगम पहले उन्हें सुनवाई का अवसर देगा और उसके बाद निर्णय पारित करेगा। यदि पारित आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ होता है तो उसके बाद सात दिन तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

निगम ने मास्टर प्लान का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर सभी को मकान तोडऩे के लिए कहा

उज्जैन के मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट घोषित किया गया है। शिप्रा नदी के दोनों ओर 200 मीटर क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट बताया गया है। अभिभाषक अमन मालवीय ने बताया कि इस क्षेत्र में कई लोग 50 साल से भी ज्यादा समय से रह रहे हैं। निगम ने मास्टर प्लान का हवाला देते हुए नोटिस जारी कर सभी को मकान तोडऩे के लिए कहा है। तीन दिन में यह काम करने की चेतावनी दी।

उज्जैन नगर निगम के इस नोटिस के खिलाफ सिद्धसेन मार्ग निवासी बाबू गिरी, राजेश और संतोष बाई ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की

मकान तोडऩे के नोटिस से इलाके में हड़कंप मच गया। उज्जैन नगर निगम के इस नोटिस के खिलाफ सिद्धसेन मार्ग निवासी बाबू गिरी, राजेश और संतोष बाई ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में डर जताया गया था कि निगम बगैर उनकी बात सुने ही कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक और यदि पारित आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ होता है तो उसके बाद सात दिन तक कोई कार्रवाई नहीं

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सभी याचिकाकर्ताओं ने जो जवाब और उसके साथ दस्तावेज पेश किए हैं, निगम उन पर कानूनी तौर पर विचार करेगा। उसके बाद याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देकर तर्कसंगत तथा सकारण आदेश पारित किया जाएगा। जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक और यदि पारित आदेश याचिकाकर्ताओं के खिलाफ होता है तो उसके बाद सात दिन तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।