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देवी अहिल्या संस्था की आज आ सकती है रिपोर्ट

संस्था संचालकों के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच हुई पूरी

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सहकारिता विभाग इंदौर कार्यालय

सहकारिता विभाग इंदौर कार्यालय

इंदौर. देवी अहिल्या संस्था के संचालकों के खिलाफ हुई शिकायतों की जांच पूरी हो गई है। जांच रिपोर्ट मंगलवार को उपायुक्त के समक्ष पेश हो सकती है। संस्था के खिलाफ हुई शिकायतों में एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम, एक ही परिवार में एक से ज्यादा प्लॉट आवंटन की शिकायतों को सही पाया गया है।

देवी अहिल्या संस्था के सालभर पहले चुने गए संचालकों के खिलाफ फरवरी माह में सदस्यों ने शिकायत सहकारिता विभाग को की थी। जिसमें सदस्यों ने संस्था में एक ही परिवार के कई सदस्य, एक ही परिवार के कई सदस्यों को प्लॉट आवंटन करने, संस्था अध्यक्ष के ही परिवार के कई सदस्यों के प्लॉट आवंटन, अध्यक्ष द्वारा ही संस्था से हित लेने जैसे मामलों की शिकायत हुई थी। इसके अलावा संस्था में नाबालिगों को भी सदस्य बनाने जैसे गंभीर मुद्दों पर शिकायत की गई थी। इन सभी की जांच सहकारिता विभाग ने करने के आदेश जारी किए थे। लगभग 8 माह तक इसकी जांच जारी थी। उपायुक्त सहकारिता और संयुक्त आयुक्त सहकारिता द्वारा अलग-अलग जांच बैठाई गई थी। वही ये दोनों ही जांच पूरी हो गई है। वहीं बताया जा रहा है कि इसमें संस्था अध्यक्ष विमल अजमेरा के खिलाफ हुई शिकायतों को सही पाया गया है। इसके अलावा संस्था में एक ही परिवार के ही कई लोगों के सदस्य होने की शिकायत भी सही पाई गई है। इनके बारे में जानकारी होने के बाद में भी संचालकों द्वारा इन सदस्यों को संस्था से बाहर नहीं किया गया। वहीं संस्था में एक ही परिवार के लोगों को एक से ज्यादा प्लॉट की रजिस्ट्री करने और उन्हें कैंसल नहीं करवाने के लिए भी संचालकों को दोषी पाया गया है। हालांकि अभी ये जांच रिपोर्ट पेश नहीं हुई है। वहीं उपायुक्त सहकारिता एमएल गजभिए के मुताबिक जांच तो पूरी हो गई है। उसकी रिपोर्ट को तैयार किया जा रहा है। एक दो दिनों में रिपोर्ट आ जाएगी। रिपोर्ट देखने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बाहर हो सकते हैं संचालक

सहकारिता नियमों के तहत संस्था संचालकों की जिम्मेदारी होती है कि संस्था में यदि कोई भी गड़बड़ी हुई है तो उस पर कार्रवाई करे। यदि कोई संचालक मंडल गड़बडिय़ों पर कार्रवाई नहीं करता है तो उसे भंग करने और जिम्मेदारों को संचालक मंडल से बाहर भी किया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो बीते साल अस्तित्व में आए संचालक मंडल के सदस्यों ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके कारण वे भी दोषी माने जा रहे हैं। वहीं बताया जा रहा है कि उन पर कोई कार्रवाई हो सकती है।