
बेटी-पत्नी के नाम संपत्ति करने के लिए वकीलों की फीस लेने पर बवाल, कांग्रेस नेताओं में छिड़ी जंग
इंदौर. संपत्ति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कमल नाथ सरकार ने रजिस्ट्री योजना शुरू की है। 11 सौ रुपए के शुल्क में सरकारी दस्तावेज तैयार करने के निर्देश जारी किए गए। इसे तैयार करने के लिए सर्विस प्रोवाइडर व वकील पांच हजार रुपए ले रहे हैं, जिस पर कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ने सवाल खड़े किए। साथ ही लायसेंस निरस्त करने तक की बात कही गई। इस पर जिला पंजीयक अभिभाषक संघ अध्यक्ष व कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव ने विरोध कर दिया। कहना है कि वकील की फीस तय करने का अधिकार किसी को नहीं है। वह उसकी योग्यता पर निर्भर है।
कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ का तर्क कोई नहीं तय कर सकता फीस
कांग्रेस के प्रदेश मीडिया पेनलिस्ट व जिला पंजीयक अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रमोद द्विवेदी के मुताबिक मुयमंत्री ने किसी प्रकार की योजना सहस्वामित्व की घोषित नहीं की है। सहस्वामित्व के दस्तावेजों में लगने वाले स्टाप शुल्क को कम किया यानी स्टांप शुल्क घटा कर कांग्रेस के वचनपत्र को निभाया। 11 सौ व सौ रुपए और सेवाप्रदाता शुल्क हजार रुपए है ना कि सौ रुपए। इसके अलावा शपथपत्र, फोटो सहित सात सौ रुपए का खर्चा आता है। वकील दस्तावेजों को बनाता है तो उसकी फीस कोई तय नहीं कर सकता, यहां तक कि सरकार भी नहीं। उसे वकील खुद तय करता है, जिस पर पक्षकार की सहमति होती है।
ये है प्रदेश कांग्रेस महासचिव की बात
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव राकेश सिंह यादव के मुताबिक मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में मात्र 1100 रुपये में पत्नी या बेटी के नाम पर रजिस्ट्री की सुविधा का कुछ सर्विस प्रोवाइडर अधिक राशि लेकर रजिस्ट्री करा रहे हैं। ये पूरी तरह से असंवैधानिक है। सरकार की योजना में अधिक राशि वसूलने वाले सर्विस प्रोवाइडर के लायसेंस शिकायत आने पर निलंबित किया जाना चाहिए। जनहित की योजना में मनमाने तरीके से 5000 वसूलना गैरकानूनी है। जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई है। रजिस्ट्री में अधिकतम खर्च 1100 रुपए फीस और अन्य शुल्क 500 रुपए तो सर्विस प्रोवाइडर सौ से तीन सौ रुपए तक ले सकते हैं।
Published on:
16 Feb 2020 12:41 pm
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