चपरासी से लेकर जज तक ही एक ही पेंशन, सांसद-मंत्री-विधायकों को एक से ज्यादा पेंशन क्यों?

जनहित याचिका में सभी को सिर्फ एक पेंशन देने की मांग, अब युगलपीठ करेगी सुनवाई...।

By: Manish Gite

Published: 03 Mar 2021, 10:30 AM IST

इंदौर। देश के विधायक, सांसद एवं मंत्रियों को एक अधिक पेंशन मिलने से जुड़े नियम में बदलाव की मांग करते हुए इंदौर हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर जस्टिस रोहित आर्य और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की युगल पीठ में सुनवाई हुई। याचिका में केंद्र सरकार के विधि विभाग सहित अन्य जिम्मेदार महकमों को पक्षकार बनाया गया है।

 

याचिकाकर्ता का कहना है जब देश में चपरासी से लेकर सुप्रीम कोर्ट के जज तक को सिर्फ एक पेंशन मिलती है तो फिर सांसद, विधायक और मंत्रियों को एक से अधिक पेंशन देने का नियम क्यों है।

 

कोर्ट ने प्रारंभिक तर्क सुनने के बाद हाई कोर्ट की नियमित युगल पीठ में याचिका की सुनवाई के आदेश दिए हैं। हालिया नियम के मुताबिक यदि कोई विधायक के बाद सांसद भी बन जाए तो उसे विधायक और सांसद का वेतन और भत्ता भी मिलता है।

 

इसी तरह राज्यसभा सांसद चुने जाने और केंद्रीय मंत्री बन जाने पर मंत्री का वेतन-भत्ता और विधायक-सांसद की पेंशन भी मिलती है, जबकि सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों को एक ही पेंशन मिलती है। वहीं, नेताओं को एक दिन का विधायक या सांसद बनने पर भी एक से अधिक पेंशन की पात्रता होती है।

 

एडवोकेट पूर्वा जैन के माध्यम से दायर याचिका में मांग कि गई है कि संविधान के मुताबिक समानता के अधिकार के कानून का पालन हो। जनप्रतिनिधियों की पेंशन के लिए भी शासकीय सेवकों की तरह गाइडलाइन बनाई जाए। कम से कम पांच साल का कार्यकाल अनिवार्य किया जाए।

 

साथ ही वे अंत में जिस पद पर रहें, उसी की पेंशन उन्हें मिले। मंत्री या निगम-मंडल में अन्य सरकारी पदों पर रहते हुए वेतन के साथ पुराने पदों की पेंशन नहीं दी जाए, क्योंकि सरकार ने मार्च 2005 के बाद नियुक्त होने वाले सरकारी कर्मचारियों की पेंशन ही बंद कर दी है।

 

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कमेटी बनाने की मांग याचिका में मांग की गई है सांसद-विधायकों के वेतन-पेंशन निर्धारण के लिए सरकार को निर्देशित किया जाए। इसके लिए कमेटी या बोर्ड बनाया जाना चाहिए जिसके पास देश के हर विधायक और सांसद का पूरा रिकॉर्ड हो ताकि वह देश में कहीं पर भी वेतन या एक से अधिक पेंशन लाभ नहीं ले सके। कम से कम पांच साल का कार्यकाल पूरा करने वाले नेता को ही पेंशन की पात्रता होना चाहिए।

 

कई नेता विभिन्न बोर्ड, निकाय, मंडल के साथ ही यूनिवर्सिटी में कुलपति से लेकर राष्ट्रीय संस्थानों के चेयरमैन तक हो जाते हैं। इन्हें पुराने पदों की पेंशन के साथ ही वर्तमान पदों का वेतन भी मिलता है, जो अनुचित है। एडवोकेट जैन ने लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा सचिवालय के साथ ही पेंशनर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट से सूचना के अधिकार कानून के तहत इससे जुड़ा रिकॉर्ड मांगा था, जो कहीं उपलब्ध ही नहीं है।

 

 

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2004 में बदला था नियम

पहले सांसदों के मामले में यह नियम था कि जिसने बतौर सांसत 4 साल पूरे कर लिए हों उसे पेंशन दी जाएगी, लेकिन 2004 में कांग्रेस की केंद्र सरकार ने इसमें संशोधन करके यह प्रावधान कर दिया था कि जो एक दिन के लिए भी सांसद बन जाता है तो वह पेंशन का हकदार हो जाएगा।

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