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 देखिए कैसे : मोहक मुद्राओं से सजा मोहिनी अट्टम

नृत्यांगना साजी मेनन ने स्टूडेंट्स के सामने दी प्रस्तुति। 

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Shruti Agrawal

Jun 28, 2016

mohini attam

mohini attam


इंदौर. केरल के नारियल के पेड़, नदियों का बहाव, बैक वाटर्स की शांत लहरें, लंबी नावें, ये सब मोहिनी अट्टम की मुद्राओं में शामिल हैं। इसीलिए मोहिनी अट्टम की मुद्राएं ज्योमेट्रिकल न होते हुए लहरांे के समान गत्यात्मक हैं। ये कहना है मोहिनी अट्टम की शीर्ष नृत्यांगना पद्मभूषण कनक रेले की शिष्या साजी मेनन का। वे स्पिकमेके के प्रोग्राम में शिरकत के लिए सोमवार को शहर आईं। इस मौके पर पत्रिका ने उनसे चर्चा की।

मोहिनी अट्टम यानी केरल का वो नृत्य जो देश के सात शास्त्रीय नृत्यों में शमिल है। इस नृत्य के बारे में उत्तर भारत में बहुत कम लोग जानते हैं। नृत्य की मोहक प्रस्तुति दी मुंबई से आईं युवा नृत्यांगना साजी मेनन ने। स्पिकमेके के आमंत्रण पर शहर के मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट में ये नृत्य पेश किया। कई स्टूडेंट्स ने पहली बार मोहिनी अट्टम देखा। साजी ने स्टूडेंट्स को डांस का परिचय और इतिहास भी बताया।

नौ रसों का संचार

साजी मेनन ने बताया, इस नृत्य में शरीर के हर अंग की मुद्राएं अलग- अलग परिभाषित की गई हैं। इसमें शिरा, वक्ष, कटि, पद और कलाई के लिए मणिबंधन मुद्राएं हैं। इन्हें अडौस कहते हैं। जब उन्हें एक साथ मिलाकर नृत्य करें तो उसे जति कहते हैं। इसके बाद उन्होंने नौ रसों को नृत्य से अभिव्यक्त किया।

वात्सल्य रस में अभिनय

साजी ने पदम प्रस्तुत से वात्सल्य रस की प्रस्तुति के लिए एक पारंपरिक मलयाली रचना 'ओमन तिंगल किड़ाहा नंद नल्ल' से मां का बेटे के प्रति वात्सल्य का वर्णन किया। इसमें मां अपने बेटे को फूल के समान कोमल, चंद्रमा के समान सुंदर बताती है। मृदंग, वॉयलिन और केरल के लोकवाद्य इडक्का की संगति में अट्टम की सुंदरता निखर आई। भक्ति पद से समापन किया।

नृत्यकारों को ही करना होगी पहल

मोहिनी अट्टम के बारे में कम जानकारी और उत्तर में इसकी कम लोकप्रियता को स्वीकार करते हुए साजी कहती हैं कि इसके लिए कलाकार ही जिम्मेदार हैं, जिन्होंने इस कला को केवल केरल तक सीमित रखा। अब कनक रेले जैसे कलाकारों की वजह से इसकी राष्ट्रीय पहचान बन रही है। इसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। कलाकारों को आगे आना होगा और इसे देशभर में ले जाना होगा। ये ध्यान रखा जाए कि ये केवल मेट्रो तक ही सीमित न रहे।

कंटेम्प्रेरी थीम लाएं

साजी ने बताया कि मोहिनी अट्टम दूसरे शास्त्रीय नृत्यों की तुलना में अधिक शुद्ध अवस्था में है। इसमें प्रयोग कम हुए हैं। ये अभी भी पारंपरिक रूप से सोलो ही किया जाता है। इसके विषय भी पारंपरिक हैं। अब इसे लोकप्रिय बनाने के लिए इसमंे कंटेम्प्रेरी थीम लाना होगी।