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शिव पार्वती का विवाह विश्वास और श्रद्धा का मिलन

- दस्तुर गार्डन में शिव पुराण सुनने के लिए उमड़ी भीड़, रिद्धी-सिद्धी का विवाह उत्सव आज

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इंदौर

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Amit Mandloi

Aug 02, 2018

shiv parvati vivah

शिव पार्वती का विवाह विश्वास और श्रद्धा का मिलन

इंदौर। शिव - पार्वती का विवाह विश्वास और श्रद्धा का मिलन है। आज के दंपतियों में कुछ अपवादों को छोडक़र विश्वास और श्रद्धा की कमी होती जा रही है, इसलिए पारिवारिक जीवन में कलह, तनाव बढ़ते जा रहे हैं। जिस दिन हम शिव जैसा विश्वास और पार्वती जैसी श्रद्धा अपने में समाहित कर लेंगे, उस दिन हमारा जीवन सुखी, समृद्धिशाली हो जाएगा। माता पार्वती ने शिव को अपना बनाने के लिए सब कुछ छोड़ दिया, इसलिए पत्नी जितना त्याग व समर्पण करेगी, उतना ही प्यार उसे पति से मिलेगा।

गुरुवार को कथा मर्मज्ञ पंडित प्रदीप मिश्रा ने दस्तूर गार्डन में अन्नपूर्णा क्षेत्र माहेश्वरी समाज हुए महिला संगठन द्वारा आयोजित शिव महापुराण कथा महोत्सव में उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के सात पुत्र हुए, जिसमें छह पुत्रों को एक स्वरूप मिला और वे कार्तिकेय कहलाए। सातवें पुत्र विघ्न विनाशक गणेश जी के रूप में अवतरित हुए। आपने कहा कि बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि भोलेनाथ की छह बेटियां भी हुई। इसीलिए किसी भी युग में बेटियों का महत्व कम नहीं हुआ है। आपने कहा कि बेटियों को दिया हुआ कभी कम नहीं होता। आपने अभिभावकों से आव्हान किया कि वे बेटियों बिदा करते समय उसे मन से सब कुछ दें लेकिन साथ में उसे संस्कारों की पोटली देना नहीं भूलें। मिश्रा जी ने कहा कि समाज में नई पहल का साहस करना चाहिए। जो लोग यह बीड़ा उठाते हैं वे चंहु ओर पूजे जाते हैं।
एक माह पहले ही मन गई गणेश चतुर्थी

अध्यक्ष अजय सोडानी व सरला हेड़ा ने बताया कि कथा प्रसंग के अनुसार भगवान गणेश का जन्मोत्सव धूम धाम व उत्सवपूर्वक मनाया। गाजे- बाजे के साथ जन्मोत्सव की खुशियां मनाई गई। सम्पूर्ण कथा स्थल की आकर्षक साज सज्जा की गई थी। ज्यों ही गणेशजी का जन्म हुआ, पूरा परिसर गणपति बप्पा मोरिया के जयघोष से गूंज उठा। एक माह बाद मनाए जाने गणेश चथुर्ती के त्योहार की झलक यहां देखने को मिल गई। बंग परिवार के साथ इस अवसर पर अशोक डागा, गोपालदास राठी, आशा साबू, ज्योति नागौरी, बंशीलाल किरण आदि मौजूद थी। प्रचार समिति की सरिता सोडानी व अर्चना माहेश्वरी ने बताया कि शुक्रवार को श्री रिद्धि- सिद्धि विवाह उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। 4 अगस्त को इस महापुराण का समापन होगा।