
कई बार सड़क किनारे गरीब, बेसहारा, बीमार, जख्मी लोग या फिर मैले-कुचैले कपड़े वाले लोगों को देखकर कई लोग मुंह फेर लिया करते हैं लेकिन इन्हीं लोगों में से एक इंदौर की महिला भी हैं, जो इन्हें देखकर कभी मुंह नहीं फेरती बल्कि इनकी मदद करती हैं। इन शख्सियत का नाम है भाग्यश्री खरखड़िया।
जी हां, भाग्यश्री (Bhagyashri Kharkhadiya) अक्सर ऐसे लोगों को देखकर दुखी हो जाती हैं और सबसे पहले उनके खाने और पहनने के लिए कपड़ों की व्यवस्था करती है। भाग्यश्री पिछले कई सालों से बेघर, असहाय और बीमार व्यक्तियों की सहायता करती हैं उनके इलाज कराती हैं और सड़क पर मृत पड़े लोगों के दाहकर्म की भी व्यवस्था करती हैं।
कई लोग फोन पर देते हैं सूचना
भाग्यश्री के इस नेक कार्य को देखते हुए अब लोग उन्हें फोन पर ऐसे लोगों की मदद के लिए सूचित करते हैं। भाग्यश्री खुद ऐसे लोगों को रेस्क्यू कर हॉस्पिटल या आश्रम ले जाती हैं और दोनों ही जगह तब तक अपनी सेवाएं देती हैं जब तक की वे पूरी तरह ठीक न हो जाएं। वह न तो किसी एनजीओ से जुड़ी हैं और न ही किसी आश्रम से, फिर भी अकेले अपने दम पर मानव सेवा कर रही हैं। उनकी इस सेवा में उम्र बाधक नहीं है। वे कई बच्चों और बुजुर्गों की मदद कर चुकी हैं और कहती हैं मैं जब तक जीवित रहूंगी तब तक मेरे द्वारा यह कार्य जारी रहेगा। पुलिस विभाग भी लावारिश लाश की शिनाख्त होने के बाद भाग्यश्री से ही संपर्क करता है।
अमरजीत सिंह सूदन से मिली सीख
भाग्यश्री ने कहा कि इंदौर शहर के नामी समाजसेवी अमरजीत सिंह सूदन के नेक कार्यों को मैं आगे बढ़ा रही हूं। उनसे यही सीखा है कि जब किसी की मदद करने का ठान ही लिया हो तो भला वो किसी भी हालत में हो हमें अपना काम करना है। इसलिए ऐसे लोगों के पुनर्वास और ट्रीटमेंट के साथ ही उनके दिवंगत होने के बाद मैं उनके दाहकर्म की भी जिम्मेदारी लेती हूं और इस काम में मेरा सहयोग शहर के कई समाजसेवी लोग भी करते हैं बल्कि मेरे पिता और पति नवीन भी मेरा इस काम में पूरा सहयोग करते हैं। भाग्यश्री का एक बेटा है और इन्हीं नेक कार्यों के लिए इन्हें कई संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है।
हर धर्म के मुताबिक कराती हैं अंतिम संस्कार
महज 32 साल की भाग्यश्री ने अब तक कई लोगों की मदद की है और कई लोगों का अंतिम संस्कार भी खुद किया है। भाग्यश्री ने कहा जिनका कोई नहीं होता और यदि किसी के धर्म के बारे में मुझे जानकारी मिल जाती है तो मैं उनके मरणोपरांत उनक अंतिम संस्कार उसी रीति-रिवाज से पंडित के द्वारा पूर्ण कराती हूं। उन्होंने कहा कई लोगों ने मुझे बोला कि महिलाएं श्मशान नहीं जाती लेकिन मैं ये नहीं मानती क्योंकि फिर ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार कौन करेगा? इसलिए इस काम के साथ-साथ उनके मोक्ष का भी काम करती हूं बल्कि कईयों का पिंडदान भी किया है।
Updated on:
11 Jul 2022 06:07 pm
Published on:
11 Jul 2022 06:03 pm
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