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इमरजेंसी में सिटीजन तक तुरंत पहुंचेगी मदद, आईटी स्टूडेंट्स ने बनाया अनोखा मोबाइल एप

एक महीने पुलिस के साथ रहे स्टूडेंट्स, काम समझा और फिर बनाया इमरजेंसी मोबाइल एप्लीकेशंस, इंटर्नशिप में छात्रों ने पकड़ी पुलिस की कमियां

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प्रमोद मिश्रा @ इंदौर.

पहले पुलिस नाम सुनकर डर लगता था लेकिन एक महीने साथ रहे, कार्यप्रणाली को समझा तो लगा कि पुलिस का काम बेहद चुनौतीपूर्ण है। आईटी स्टूडेंट्स ने एक महीने की इंटर्नशिप के दौरान रात्रि गश्त, काउंसलिंग का हिस्सा बन समझा कि पुलिस कैसे काम करती है, उनकी कमियां भी सामने आई। तकनीकी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाते हुए सिटीजन खासकर सीनियर सिटीजन की इमरजेंसी में मदद के लिए मोबाइल एप्लीकेशन बनाना शुरू कर दिया ताकि उन्हें मोबाइल पर स्वास्थ्य, परिवहन, सुरक्षा जैसी मदद मिल जाए।


डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्रा ने पुलिस विभाग को समझने के लिए छात्रों को इंटर्नशिप का ऑफर दिया था। आमतौर पर लोग पुलिस से डरते हैं, दूर रहते हैं, इसी समस्या को देखते हुए पुलिस ने छात्रों को इंटर्नशिप ऑफर की और तीन टीम एक महीने से इंटर्नशिप कर रही है। प्रोजेक्ट प्रभारी एएसपी डॉ. प्रशांत चौबे के मुताबिक, तीन टीमों को अलग-अलग विषय दिए हैं। लॉ स्टूडेंट पुलिस की इंवेस्टिगेशन पर इंटर्नशिप कर रहे हैं तो आईटी स्टूडेंट आईटी साल्यूशन, साइबर क्राइम पर। जर्नलिज्म के स्टूडेंट सोशल पुलिसिंग पर काम कर रहे हैं। घटनास्थल पर पुलिस के साथ जाकर मौका मुआयना करना, रात्रि गश्त में शामिल होना, एफआईआर दर्ज होते समय साथ होना, इंवेस्टिगेशन का हिस्सा बनना, इंटर्नशिप का पार्ट है।


आईटी स्टूडेंट बना रहे मोबाइल एप्लीकेशन


आईएसटी कॉलेज के सात स्टूडेंट व महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज की एक स्टूडेंट का ग्रुप आईटी साल्यूशन व पुलिस सिस्टम पर इंटर्नशिप कर रहे हैं, एक महीने से यह लोग पुलिस के साथ हैं। छात्र अक्षय मिश्रा, आदित्य वर्णवाल, अनुष्ठा श्रीवास्तव, अनामिका देहरिया, आदित्य राठौर, अवनि तिवारी व मोहित की टीम एक महीने से साथ है और सोमवार को वह अफसरों को अपनी टीम देगी। इस टीम ने पुलिस की कार्यप्रणाली को समझा। टाइम मैनेजमेंट की कमी, कम्प्यूटर ऑपरेटर नहीं होना जैसी कमियों को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। इस टीम ने पुलिस को आम लोगों के करीब लाने के लिए एक मोबाइल एप्लीकेशन पर काम शुरू किया है। अक्षय के मुताबिक, एप्लीकेशन का मकसद है इमरजेंसी में सिटीजन खासकर सीनियर सिटीजन को तुरंत मदद मिले इसे ध्यान में रखकर यह एप्लीकेशन बन रही है। एप्लीकेशन में स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन, सुरक्षा के लिए पुलिस मदद जैसे सारे इमरजेंसी नंबर मौजूद रहेंगे। दवा, डॉक्टर, ऑटो टैक्सी आदि एप्लीकेशन में रहेंगे ताकि एक क्लिक कर संबंधित को बुला सकें।

गुंडा फाइल से लेकर जनसुनवाई तक नजर


लॉ स्टूडेंट जैकब के मुताबिक, पुलिस के साथ रहकर समझा है, वे कैसे आरोपी पकड़ते है, एफआईआर कैसे दर्ज होती है, गुंडा फाइल कैसे बनती है। गुंडा फाइल की निगरानी के आसान तरीके की योजना पर स्टूडेंट काम कर रहे है। जर्नलिज्म के स्टूडेंट जनसुनवाई की शिकायतों की निगरानी की योजना पर काम कर रहे है। डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र के मुताबिक, इंटर्न छात्र जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश करेंगे उसे अमल में लाने का प्रयास करेंगे।