
ऐसा खूबसुरत है लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान का सौंदर्य
इंदौर. अक्षित गर्ग 18 साल के ही हैं पर उनके फोटोग्राफ्स देखकर लगता है जैसे किसी सीनियर फोटोग्राफर का काम हो। फोटोग्राफी उनका पैशन है। इस साल गर्मियों में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र की 23 दिन की यात्रा की और इस दौरान खींचे गए छायाचित्रों की एग्जीबिशन शनिवार को प्रीतम लाल दुआ सभागृह में लगाई। 50 से ज्यादा फोटो की यह एग्जीबिशन दर्शकों को लद्दाख की खूबसूरती के दर्शन कराती है।
लद्दाख को ठंडा रेगिस्तान भी कहा जाता है, क्योंकि रेगिस्तान की तरह यहां भी रेत है, रेत के टीले हैं, रेत के तूफान हैं और हरियाली कम है। हवा के थपेड़ों से रेत में जो बारीक आकृतियां बन जाती हैं, उन्हें अक्षित ने भी काफी बारीकी से कैमरे में कैद किया है। एग्जीबिशन की शुरुआत लद्दाख की सुमूर वैली की शाम से होती है, जहां अंधेरे में छिपते जा रहे पहाड़ों के बीच बारीक सा चांद नजर आता है। प्रदर्शनी में वहां की मशहूर पैंगगॉन्ग झील के कई फोटोग्राफ हैं जो अलग-अलग एंगल से अलग-अलग प्रहर में लिए गए हैं। इस झील के पानी का रंग सुबह कुछ और दिखता है और शाम को कुछ और। झील के चांदी जैसे चमकते पानी के पार भूरे रंग के पहाड़ खूबसूरत मंजर बनाते हैं। एक फोटो में पेंगगॉन्ग झील के पानी में हरे, नीले और सुनहरे रंग के शेड्स एक साथ दिख रहे हैं।
पत्थरों की खूबसूरती
लद्दाख की सुमूर, हुंडर, श्योक और सरचू वेली की कई तस्वीरें हैं, जिनमें पत्थरों के टैक्स्चर को उभारा गया है। अक्षित बताते हैं कि सर्दियों में पहाड़ों पर बर्फ जमी रहती है। जब गर्मियों में पिघलती है तो पत्थरों पर उसके निशान रह जाते हैं। कई जगह ये निशान एेसे नजर आते हैं जैसे किसी चित्रकार ने ब्रश से स्ट्रोक लगाए हों। पहाड़ों के कहीं खुरदुरे तो कहीं चिकने ढलान हैं तो कहीं दो पत्थर एेसे हैं जैसे दो मानव आकृतियां। हुंडर वेली में रेत के टीले और पृष्ठभूमि में पहाडि़यों की शृंखला को कैद किया है।
Published on:
02 Dec 2018 12:36 pm
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