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और राग सब बने बराती, दूल्हा राग वसंत…

संगीत के स्वरों से सुनील मसूरकर ने किया वसंत का स्वागत

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Hussain Ali

Feb 10, 2016

इंदौर.
ऋतुओं के राजा वसंत और संगीत का पुराना रिश्ता है, इसी रिश्ते को निभाने के लिए संस्था कला संदेश ने कार्यक्रम वसंत है आयाÓ आयोजित किया। राजेंद्र माथुर सभागार में संगीत के जरिए वसंत का अहसास शास्त्रीय गायक पं. सुनील मसूरकर ने कराया। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की एक बंदिश के बाद उपशास्त्रीय रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।


मसूरकर ने कार्यक्रम की शुरुआत राग वसंत से की, जिसकी बंदिश थी और राग सब बने बराती दूल्हा राग वसंत। इस बंदिश ने माहौल में वासंती रंग घोल दिया। इसके बाद उन्होंने कुछ दादरे और ठुमरी सुनाई। राग मिश्र पहाड़ी में दादरा था, रंगी सारी गुलाबी चुनरिया मोहे मारे नजरिया सांवरिया...। इसके बाद राग किरवानी में दादरा सुनाया, क्या जादू कर डारा दीवाना किए श्याम...। दो दादरों से महफिल जमाने के बाद उन्होंने राग सोहनी में एक ठुमरी सुनाई, काहे को मोरे घर आए...। ठुमरी और दादरों के बीच मसूरकर ने एक होरी भी सुनाई जिसके बोल थे, आज बिरज में होरी रे रसिया...। इस होरी के बाद फिर एक दादरा गाया और अंत में भैरवी में बंदिश गाई, हमारी अटरिया पे आजा रे सांवरिया....।


संगीत की इस महफिल में मसूरकर ने साबित कर दिया कि संगीत की सभी विधाओं पर उनका समान अधिकार है। उनके साथ हारमोनियम पर पं. गोविंद पोटधन ने संगत की और तबले पर थे विजय राव। प्रारंभ में संगीत कला संदेश के अभिषेक गावड़े और संजीव गवते ने कलाकारों का स्वागत किया।

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