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कभी हिंदी में उड़ा था मजाक, कमेंट्री के जरिए लाखों दिलों में उतर गया ये शख्स

एक बार ऑस्ट्रेलिया की टीम मुंबई में टेस्ट मैच खेल रही थी। सुशील दोषी को मैच देखने जाना था, दोषी ने किसी तरह अपने पिताजी को इस बात के लिए तैयार कर लिया था कि वे उन्हें मैच दिखाने के लिए ले जाएं। सुशील मुंबई तो पहुंचे लेकिन स्टेडियम के अंदर जाना संभव नहीं हो रहा था। 

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Nitesh Tiwari

Sep 29, 2016

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भोपाल/इंदौर. भारत और न्यूजीलैंड के बीच पहले टेस्ट की शुरुआत से ही क्रिकेट प्रेमियों में इंदौर टेस्ट को लेकर उत्साह बढ़ता जा रहा है। बता दें की मध्यप्रदेश के इंदौर के होलकर स्टेडियम में 8 अक्टूबर को भारत अपना तीसरा टेस्ट मैच खेलेगा। भारत तीन मैचों की सीरिज में एक शून्य से आगे चल रहा है। इस सिलसिले में mp.patrika.com आपको मध्यप्रदेश और इंदौर से जुड़े क्रिकेट किस्से बता रहा है। आज के किस्से में हम सुशील दोषी की बात कर रहे हैं। जिन्हें इस वर्ष पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है।

दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान से मैं सुशील दोषी बोल रहा हूं। साफ आसमान, खुली हुई धूप, रह रहकर चलती हवा। भारत ने टॉस जीता है और बल्लेबाजी का फैसला किया है। बॉब विलिस की पहली गेंद गावस्कर को। आफ स्टंप से थोड़ा बाहर। गावस्कर ने गेंद को अच्छी तरह समझा, बैकफुट पर गए, शॉट के लिए जगह बनाई और कवर की तरफ खेला। पहला रन भारत के खाते में। पहला रन गावस्कर को। क्रिकेट में ये शब्द, ये अहसास श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करते थे। यह क्रिकेट की कमेंटरी थी, जिससे लाखों करोड़ों लोग दशकों तक अभिभूत रहे।

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यह क्रिकेट कमेंट्री दर्शकों को रोमांचित तो करती ही थी , जिस तरह रेडियो के नाटकों में श्रोता परिकल्पना करता है, वैसे ही क्रिकेट के मैदान की पूरी गतिविधियां सुनने वालों की कल्पना में आती थी। यह कमेंटेटर और श्रोताओं के बीच एक अद्भुत तानाबाना था जिसमें वह जो आंखो देखा हाल सुनाता था, उससे श्रोताओं को यही लगता था कि वह कोई मैच देख रहे हैं। चाय की दूकान हो, या पान की दुकान या लोगों के घर हर जगह कमेंट्री की आवाज सुनाई देती थी।

एक बार ऑस्ट्रेलिया की टीम मुंबई में टेस्ट मैच खेल रही थी। सुशील दोषी को मैच देखने जाना था, दोषी ने किसी तरह अपने पिताजी को इस बात के लिए तैयार कर लिया था कि वे उन्हें मैच दिखाने के लिए ले जाएं। सुशील मुंबई तो पहुंचे लेकिन स्टेडियम के अंदर जाना संभव नहीं हो रहा था। बाहर भी लोगों का जमघट था। लेकिन सुशील को तो खिलाड़ियों को अपने सामने खेलते हुए देखना था।


पिता स्टेडियम के बाहर करते थे इंतजार
उनके पिताजी ने काफी कोशिश की लेकिन टिकट की बात नहीं बनी। गेट पर एक पुलिस वाला थोड़ा मेहरबान हुआ। गेट पर पुलिस वाले ने कहा कि दोनों में किसी एक व्यक्ति को तो जाने दे सकता हूं, दोनों को नहीं। फिर सुशील दोषी को ही अंदर जाना था। पिता ने बेटे के लिए तीन दिन तक रोज पांच छह घंटे स्टेडियम के बाहर गुजारे। स्टेडियम में ही जब बॉबी तल्यार खान और विजय मर्चेंट को कमेंट्री करते हुए देखा तो ठान ली थी कि अब कुछ नहीं कमेंटेटर ही बनना था।


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धर्मवीर भारती ने भ की थी टिपण्णी
सुशील दोषी ने क्रिकेट की खास शैली विकसित की। उनकी क्रिकेट कमेंट्री ही थी कि प्रख्यात लेखक धर्मवीर भारतीजी ने एक बार कहा था कि सुशील दोषी ने अपनी कमेंट्री से हिंदी की बहुत सेवा की। इस कमेंट्री को मुंबई में भी सुना गया, असम में भी पणजी, उड़ीसा, बिहार, उप्र, हिमाचल, कहां-कहां नहीं पहुंची यह कमेंट्री।


ऐसे रहा जीवन
सुशील दोषी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। एक समय था जब इंदौर आकाशवाणी के स्टेशन डायरेक्टर उनकी बात पर हंस पड़े थे, कमेंट्री वो भी हिंदी में। बहुत मुश्किल है हिंदी में क्रिकेट कमेंट्री करना। आखिर शॉर्टपिच गेंद को क्या कहोगे, बैक फुट ड्राइव को क्या कहोगे, स्केवर लेग, ओवर द विकेट को क्या कहोगे। थर्ड मैन को क्या कहोगे तीसरा आदमी।


इस तरह दिया था जवाब
जवाब भी बहुत आसान था, इन्हें कुछ और कहने की जरूरत ही नहीं, ये शब्द बने रहेंगे पर कहा हिंदी में जाएगा। क्या यह नहीं कह सकते कि शार्ट पिच गेंद आफ स्टंप के बाहर, बल्लेबाज बैकफुट पर गए , खूबसूरती के साथ खेला चार रन के लिए। जो क्रिकेट खेला था उससे अच्छी मदद मिली। तब पता रहता था कि किस गेंद को बल्लेबाज कैसे खेल सकता है।

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1968 में शुरू की कमेंट्री
1968 में रणजी ट्राफी में सुशील दोषी ने पहली बार क्रिकेट कमेंट्री की थी। उसके बाद टेस्ट मैच, विश्व कप, एकदिवसीय मैच, लगभग हर बड़े टूर्नामेंट्स में सुशील दोषी ने कमेंट्री की। क्रिकेट की दुनिया में पिछले चार दशकों में कई रोमांचक क्षणों के साक्षी रहे हैं सुशीष दोषी।


नकल करना इस मुकाम तक ले आया
'कमेंट्री करना मेरा ख्वाब था। मैं घर में कमेंट्री की नकल किया करता था। तब मुझे नहीं मालूम था कि वह नकल करना मुझे इस मुकाम तक पहुंचा देगा।'

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दुनिया के तीसरे ऐसे व्यक्ति जिनके नाम से है क्रिकेट कमेंट्री बॉक्स
सुशील दोषी दुनिया के तीसरे ऐसे व्यक्ति हैं जिनके नाम से क्रिकेट कमेंट्री बॉक्स बनाया गया है। लंदन के ओवल में ब्रायन जॉन्स्टन, पाकिस्तान के लाहौर में गद्दाफी स्टेडियम में उमर कुरैशी और भारत में पहला कमेंटेटर बॉक्स सुशील दोषी के नाम पर बनाया गया।

-सुशील दोषी इंदौर के रहने वाले हैं।
-उनके नाम पर इंदौर के होलकर क्रिकेट स्टेडियम में कमेंट्री बॉक्स है।
-सुशील अब तक 400 से ज्यादा वनडे मैचों की कमेंट्री कर चुके हैं।
-इसके अलावा उन्होंने 85 टेस्ट मैचों में भी कमेंट्री की है।
-उन्हें नौ वर्ल्ड कप (50 ओवर के पांच और चार टी20 वर्ल्ड कप) में भी कमेंट्री करने का गौरव हासिल है।