
इंदौर. शहर में कोरोना के चलते पाबंदी के बावजूद खजराना इलाके में ताजिये के जुलूस निकालने पर अब तोबड़तो़ड़ कार्रवाई शुरु हो गई है। जिला प्रशासन ने सख़्ती करते हुए थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया है। और संबंधित एसडीएम को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और इस मामले में सीएसपी पर भी गाज गिर सकती है। कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया है कि कानून का उल्लंघन करने वालों पर रासुका की कार्यवाही प्रस्तावित की जा रही है साथ ही उन लोगों को भी चिंहित किया जा रहा है जिन्होने ताजिया की जुलूस निकालने के लिये लोगों तक संदेश पहुंचाया था।
पुलिस-प्रशासन पर सवाल
जिला प्रशासन की कार्रवाई के बाद इस मामले में सियासत शुरु हो गई है। इंदौर 4 से विधायक आलिनी गौड़ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है और जिला प्रशासन की कार्रवाई को नाकाफी बताया है। साथ ही पुलिस पर उंगली उठाते हुए लिखा कि पुलिस का इंटेलीजेंस पूर्ण रूप से फेल हुआ है। इस प्रकार की घटना होने में पुलिस प्रशासन का दोष है ही साथ ही अन्य जिम्मेदार लोग भी दोषी है। इस पूरे प्रकरण में एक थाना प्रभारी मात्र को दोषी बनाकर प्रशासन पल्ला झाड़ नहीं सकता अपितु इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और संबंधित अधिकारीयों पर भी कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए |
सीएम को पत्र
विधायक ने पत्र में लिखा है कि कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा केस इंदौर में आये हैं। पूरे शहर में कोरना गाइड़लाईन का पालन कर रहे हैं परन्तु लगातार यह देखने में आया है कि शहर के अल्पसंख्यक समाज द्वारा बार-बार तनाव पूर्ण स्थिति पैदा की जा रही है चाहे वह रानीपुरा, टाटपट्टी बाखल, सिलावटपुरा या चंदन नगर में पुलिस के साथ मारपीट जैसी घटना हों, ऐसी ही एक घटना 30 अगस्त 2020, रविवार को लॉकडाउन के दिन शहर में मोहर॑म के त्यौहार के अंतिम दिन बिना किसी अनुमति के खजराना क्षेत्र में अल्पसंख्यक समाज द्वारा जुलूस निकाला गया है, जिसमें हजारों की संख्या में लोग सम्मिलित हुए और खजराना क्षेत्र के साथ-साथ शहर के राजबाड़ा व आसपास के क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। जहाँ कोरोना गाईंडलाइन के अनुसार किसी भी प्रकार की सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया एवं एक भय का वातावरण पैदा करने की कोशिश की गईं।
Published on:
31 Aug 2020 02:56 pm
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