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TEACHER’S DAY : गुरु जिन्होंने बदले किताबी ज्ञान के मायने और युवा सपनों को लगा दिए पंख

शिक्षक दिवस आज: रचनाधर्मिता से शिक्षा को बनाया आसान

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इंदौर

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Reena Sharma

Sep 05, 2019

TEACHER'S DAY : गुरु जिन्होंने बदले किताबी ज्ञान के मायने और युवा सपनों को लगा दिए पंख

TEACHER'S DAY : गुरु जिन्होंने बदले किताबी ज्ञान के मायने और युवा सपनों को लगा दिए पंख

इंदौर. समय के साथ शिक्षक की भूमिका और महत्ता में बदलाव आ रहा है। ‘गूगल गुरु’ के इस युग में पारंपरिक शिक्षण पद्धति में रचनात्मक बदलाव कर शिक्षक अपने विद्यार्थियों तक आसानी से ज्ञान की गंगा पहुंचा रहे हैं। किताबी ज्ञान के मायने बदलने से विद्यार्थी न केवल 100 प्रतिशत अंक प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि पथ-प्रदर्शक से मिली सीख से चुनौतियों को हल कर अपने सपनों को पंख लगा रहे हैं। शिक्षक दिवस पर विशेष रिपोर्ट..

स्टेशन मास्टर जरूरतमंदों के लिए बने पथ-प्रदर्शक

5 माह पहले राजू सैनी की पोस्टिंग बतौर इंदौर रेलवे स्टेशन मास्टर के रूप में हुई है। जब से वे स्टेशन पर आए हैं अनपढ़ लोगों को भी पढऩा सिखाना शुरू किया। स्टेशन पर काम करने वाले को सरकारी नौकरी की तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हें किताबें भी उपलब्ध करवाईं। सैनी लंबे समय से मालवा मिल क्षेत्र की छोटी बस्तियों के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रहे हैं।

शाम को ड्यूटी खत्म होने के बाद वे यही काम करते हैं। कुछ सालों में उनके पढ़ाए बच्चों में से कई लोको पायलट, पटवारी, जिला कोर्ट, हाइकोर्ट, टीटी जैसी पोस्ट पर चयनित हो चुके हैं। सैनी के मुताबिक, अब वे सडक़ों, रेलवे स्टेशनों पर भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों के लिए काम करेंगे। इन बच्चों की जानकारी इक_ा कर योजना बना रहे हैं, ताकि उसके लिए संसाधन जुटा सकें। कुछ बच्चों की काउंसलिंग भी शुरू कर दी है। पेपर बांटने वाले कुछ स्टूडेंट्स हैं, जिन्हें सरकारी नौकरी के लिए तैयार करना है। वे कहते हैं, सरकारी नौकरी में आना ज्यादा कठिन नहीं है। बस आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है और मैं यही करता हूं। जब बच्चों को खुद में आत्मविश्वास आ जाता है तो वे सफल हो जाते हैं। स्किल डेवलप करने के लिए तमाम प्रयास कर रहा हूं और आगे भी पूरी लगन व ईमानदारी से करता रहूंगा।

अखबारों में छपी क्राइम स्टोरी से सिखा रहे कानून का क ख ग...

शहर और देश में आए दिन होने वाले आपराधों को कहानी जैसे समझाकर विधि व्याख्याता ने 70 सिविल जज तैयार कर दिए। छात्रों के लिए धाराओं को याद करने में परेशानी आती है, इस समस्या को हल करने के लिए पढ़ाने का नया तरीका ईजाद किया। अपराध जगत की खबरों को विद्यार्थियों को पढ़ाते, फिर अपराध से जुड़ी धाराएं और सजा के प्रावधान बताते। इस इनोवेशन के लॉ व्याख्याता पंकज वाधवानी को पॉजीटिव रिजल्ट मिले। 2002 से अब तक 550 विद्यार्थियों को पढ़ा चुके वाधवानी की इस कारण अलग पहचान बनी है।

कम्प्यूटर, लैपटॉप, प्रोजेक्टर के साथ तबला-ड्रम की भी शिक्षा

दो दशक पहले नशेडि़यों का अड्डा होता था जो परिसर आज इंदौर शिक्षा विभाग की शान है। कभी बच्चों की आमद के लिए?तरसते स्कूल में अब ४५५ विद्यार्थियों में 253 तो बालिकाएं ही हैं। कुलकर्णी का भट्टा स्थित शा. मा. विद्यालय क्र. 51 में यह बदलाव प्रधान अध्यापिका अनुतला सिंह तंवर के इनोवेशन का ही परिणाम है। उनके पढ़ाने की कला के सभी बच्चे कायल हैं। अनुतला सिंह स्कूल में 10 कम्प्यूटर, 7 लैपटॉप, 42 इंच टीवी, प्रोजेक्टर, हारमोनियम, तबला, ड्रम के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दे रही हैं।

सिक्के जमाकर गणित, मॉडल से समझाते हैं तकनीक

शासकीय प्राथमिक विद्यालय क्रमांक 130 के दो शिक्षकों का पढ़ाने का तरीका अनूठा है। इनका मानना है किताबों से तो बच्चे सीखते ही हैं लेकिन व्यवहारिक तरीके से उन्हें पढ़ाया जाए तो बच्चे जल्दी सीख जाते हैं। स्कूल में पांच कक्षाओं केबीच दो शिक्षक जागृति शर्मा और प्रमोद सिंह परिहार है। दोनों मिलकर पहली से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाते हैं। इन्होंने एक दर्जन से अधिक मॉडल बना रखे हैं ताकि बच्चों को प्रभावी रूप से सिखाया जा सके। गणित सिखाने के लिए एक, दो, पांच और दस के सिक्कों का सहारा लिया जाता है। सिक्कों को जमाकर बच्चों को जोडऩा, घटाना बताते हैं। स्कूल में आरओ है लेकिन वो पानी स्वच्छ कैसे करता हैं उसके लिए आरओ का मॉडल बनाकर स्कूल में रखा है ताकि बच्चे तकनीक समझ सकें। इस स्कूल में माचिस की तीलियों से बच्चे आकृतियां बनाना सीख रहे हैं। अनूठे तरीके को लेकर स्कूल को प्रदेश स्तर की ‘हमारी शाला कैसी हो’ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला है।

टीचर-स्टूडेंट ग्रुप बनाकर जीत की राह दिखा रहीं बड़ी टीचर

नवाचारी शिक्षक स्मिता राठौर पढ़ाने की तकनीकों में नवाचार कर रही हैं। स्कूल में बच्चों को भावनात्मक, सामाजिक तौर पर मजबूत करने के लिए प्रयोग कर रही हैं। बच्चों को टीचर्स के साथ समूह में बैठाकर चर्चा करवाती हैं। ग्रुप डिस्कशन में बच्चे परिवार जैसे ही अपनी समस्याओं को साझा कर उनका हल खोजते हैं। इसी तरह हम बच्चों का जन्मदिन विशेष तरीके से मवाते हैं। उनके पैरेंट की मौजूदगी में हर बच्चे से बर्थ डे बेबी की खूबियों का बखान करते हैं।? पढ़ाई के साथ ही अतिरिक्त गतिविधियों में भी नवाचार कर रही हैं।

‘एक लडक़ी को देखा तो ऐसा लगा’ से समझाए उत्कृष्ट अलंकार

शहर की हिंदी शिक्षिकाओं में विशेष शैली से अलग पहचान बना चुकी अमृता अवस्थी 18 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में हैं। हिंदी केंद्र निदेशालय, दिल्ली द्वारा उत्कृष्ट हिंदी शिक्षक अवॉर्ड से सम्मानित अमृताबताती हैं हिंदी में कई विधाएं होती हैं। कविता पढ़ाते हुए बच्चों को हर काल की जानकारी देती हूं। कहानी पढ़ाती हूं तो कहानी लेखन पर भी चर्चा करती हूं। व्याकरण में उत्कृष्ट अलंकार को समझाने के लिए फिल्मी गाने ‘एक लडक़ी को देखा तो ऐसा लगा’ जैसे गाने सुनाती हूं। संस्मरण लेखन में बच्चों के अनुभव उन्हें हिंदी के करीब लाता है।