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इंदौर। चिमनबाग स्थित छत्रपति शिवाजी राव स्कूल की बिल्डिंग आम नहीं है। वर्ष 1918 में बनी यह बिल्डिंग अब भी मजबूत है। एक समय में यह मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा शिक्षण संस्थान था और दूर-दूर से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। बिल्डिंग का निर्माण हॉलैंड की कंपनी ने किया था और अधिकांश निर्माण साम्री वहीं से लाई गई थी। निर्माण सामग्री हॉलैंड से समुद्री जहाज और फिर हाथियों से यहां लाई गई थी। यहां के पिलर अब भी मजबूत हैं और खिड़कियों की बनावट आकर्षक है। इसमें लगी लकड़ियां भी अब तक खराब नहीं हुई है। सेवानिवृत्त प्रोफेसर अनिल पांड्या ने बताया कि इस बिल्डिंग में सबसे पहले इंदौर मदरसा नाम से शिक्षण संस्था संचालित होती थी।
पहले प्रिंसिपल सर डॉक्सन थे। इनके नाम से डॉक्सन बंगला भी बना है, जिसमें अब जेडी ऑफिस लगता है। बिल्डिंग की दीवार करीब 18 इंच की है। वर्ष 1964 में केंद्र सरकार ने डॉ. दौलतसिंह कोठारी की अध्यक्षता में स्कूल शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोग का गठन किया था। डॉ. कोठारी भी इसी स्कूल से पढ़े थे। बिल्डिंग में कभी जीर्णोद्धार नहीं हुआ। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इसका सर्वे जरूर किया गया था, लेकिन फिर कोई काम नहीं हुआ।
फ्रेंच गोथिक शैली से बना है केईएम भवन
हेरिटेज बिल्डिंग में शामिल केईएम अ वर्ष 1848 में बनाई थी। बिल्डिंग किस कम नहीं है। इसकी निर्माण सामग्री आई थी। यह भवन फ्रेंच गोथिक शैली गया है। भवन में पहले अस्पताल था, मध्यभारत में चिकित्सा शिक्षा और सु कमी से लोगों की मांग पर वर्ष 1878 किंग एडवर्ड मेडिकल स्कूल शुरू कि सेवानिवृत्त प्रोफेसर और जीर्णोद्धार अध्यक्ष रहे प्रो. ज्ञानेश शुक्ला ने बता 1948 में केईएम स्कूल को एमजीएम कॉलेज में तब्दील कर दिया गया।
Published on:
18 Apr 2022 05:24 pm
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