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ट्रांसजेंडर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने दिया बड़ा बयान महिलाएं हथियार की तरह…

इंसान को इंसान समझें, इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए, पंरपराओं को तोड़ नई मिसाल कायम करनी पड़ती है ताकि आने वाली पीढ़ी को रिस्क लेने की सीख मिल सके।

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इंदौर

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Amit Mandloi

Feb 18, 2018

laxmi narayan tripathi

एक्रोपोलिक्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ओर से ‘बियॉन्ड द एजेस’ थीम पर टेड एक्स का आयोजन

इंदौर. जिंदगी में कुछ भी हासिल करने के लिए आउट ऑफ द बॉक्स सोचना पड़ता है। पंरपराओं को तोड़ नई मिसाल कायम करनी पड़ती है ताकि आने वाली पीढ़ी को रिस्क लेने की सीख मिल सके। जिंदगी में नाकामयाबी से कामयाबी, अपने वजूद और समाज में बदलाव के किस्से के साथ स्टूडेंट्स को देश की ख्यात हस्तियों ने शनिवार को रवींद्र नाट्यगृह में एक्रोपोलिक्स ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ओर से ‘बियॉन्ड द एजेस’ थीम पर आयोजित टेड एक्स में संबोधित किया। इसमें जीवन की सीख लोगों को मिली तो कुछ अपने साथ नई उम्मीद और आत्मविश्वास लेकर गए। कार्यक्रम का नॉलेज पार्टनर फिक्क फ्लो रहा।

महिलाएं हथियार की तरह न करें अधिकारों का इस्तेमाल
लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी, ट्रांसजेंडर राइट्स एक्टिविस्ट

की पॉइंट - आज मुझे बियॉंन्ड द एजेस सब्जेक्ट पर बोलने के लिए कहा गया है। मैं कभी भी सोसायटी के बॉक्स में फिक्स नहीं हो पाई हूं। इसीलिए सबसे कहती हूं इंसान को इंसान समझे, इससे ज्यादा कुछ नहीं। स्त्री, पुरुष या तीसरा जेंडर समझने से परेशानियां शुरू हो जाती हैं। हमारे एजुकेशन सिस्टम में बच्चों को सिविक सेंस नहीं सिखाया जाता है। ये सबसे बड़ी कमी है। हमें बच्चों को सिखाने की जरूरत है कि हर जेंडर का सम्मान करें। सभी को समान अधिकार मिलने चाहिए। महिलाएं अपने अधिकारों का इस्तेमाल हथियार की तरह न करें। केवल स्त्री ही इस दुनिया में संपूर्ण है। कृष्ण ने भी गीता में कहा है कि मैं सारी प्रकृति में नारी की भूमिका को देखता हूं। मुझे कई बार सेक्सुअली अब्यूज किया गया, शायद इसी का परिणाम है कि मैंने बदलाव के लिए आवाज उठाई और सारी दुनिया मुझे सम्मान से देखती है।
फोर अ चेंज- हर व्यक्ति आजाद है। आज के समय में नारी की लक्ष्मण रेखा तय करने की जरूरत नहीं है। महिलाओं को पूरा अधिकार है कि वे अपनी जिंदगी अपनी सोच के हिसाब से चुनें।

टेकअवे- हर दिन खुद से प्यार करें। खुश रहने का यही एक मंत्र है।


पेट की आग से बड़ी आग कौनसी?
पीयूष मिश्रा (एक्टर-राइटर)

जिंदगी में जब भी औरतें आती हैं तो आपकी जिंदगी में कई अंतर कर जाती हैं। वैसे ही मेरी जिंदगी में भी कुछ ने अंतर किया है। हो सकता हैं कि ये महज मेरी कल्पना हो। ये अंतर आपके सामने पेश कर रहा हूं। इस बात के साथ जब पीयूष मिश्रा ने अपनी हाल ही में लिखी कविता उनके लफ्जों में अपनी ताजी कविता तुम मेरी जान हो रजिया बी...तुम बड़ी महान हो रजिया बी.. पढऩा शुरू किया को हॉल तालियों से गूंज उठा। ये कविता एक वैश्या से उनकी बातचीत है जो उन्हें जीवन की सच्चाई से रूबरू करवाती हैं। कविता के आखिर में रजिया बी की बेटी का आखिरी सवाल मन को व्यथित कर देता है कि पेट की आग से बड़ी आग कौन सी होती है।


टेकअवे- सिर्फ काम करो, काम करो और काम करो

उन्होंने कहा कि जिंदगी में ऐसा कुछ नहीं जो बिना काम के हासिल किया जा सकता है। मेरी जिंदगी में युवाओं को बस यही सीख है कि बस काम करो। इससे ज्यादा और कम कुछ है ही नहीं जिंदगी में करने के लिए। सिर्फ आपका काम ही आपको एक नया मुकाम दिला सकता है। लोग फिल्मों में नैपोटिज्म की बात करते हैं, लेकिन मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया। नवाज, सुशांत सिंह राजपूत और इरफान इसके बहुत बड़े उदाहरण हैं।


देश में बेसिक साइंस पर रिसर्च की जरूरत
युवराज भारद्वाज, फाउंडर जिनीथ वाइपर

सबसे कम उम्र में पद्मश्री २०१८ के लिए नॉमिनेट हुए १८ वर्षीय युवराज भारद्वाज ने अपने सेशन में कहा कि भारत को स्टीरियोटाइप सोच से बाहर निकलना होगा। हम अगर इंजीनियर और डॉक्टर बनने का प्रेशर देंगे तो अच्छे इनोवेटर देश को नहीं दे पाएंगे। देश में बेसिक साइंस पर इनोवेशन की जरूरत है। रिसर्च पर काम किया जाना चाहिए। युवराज जिनीथ वाइपर कंपनी के फाउंडर हैं। २०१६ में उन्हें करमवीर चक्र दिया जा चुका हैं।