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बेरोजगार युवाओं से वर्क फ्रॉम होम के नाम पर लाखों की ठगी, 300 लोगों की शिकायत के बाद बंटी-बबली गिरफ्तार

Work From Home Fraud : कंपनी द्वारा कहा जाता था कि डाउनलोडिंग करने पर रुपए मिलेंगे। कंपनी ने रुपए जमा कर कर्मचारियों की आइडी बना दी। लोगों को कुछ महीनों तक से रुपए दिए भी, लेकिन अचानक रुपए देना बंद कर दिए।

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Work From Home Fraud

Work From Home Fraud :मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर में वर्क फ्रॉम होम के नाम पर सैकड़ों लोगों से लाखों रूपए की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक के बाद एक शिकायतें सामने आने के बाद तुकोगंझ थाना पुलिस ने मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) कंपनी की एक महिला और पुरुष यानी दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपी बेरोजगारों से लाखों रुपए ठगी करके भागने की तैयारी में थे। शिकायत करने के बाद पीड़ितों ने खुद आरोपियों को बैठक के लिए बुलाया और पीछे से पुलिस को इसकी सूचना दी। फिलहाल, मौके पर पुहंची पुलिस ने दोनों आरोपी महिला पुरुष को गिरफ्तार कर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

तुकोगंज पुलिस के मुताबिक, जाय बिल्डर्स, साकेत नगर में रहने वाले देवेंद्र चंदानी समेत दीपिका चौहान, महेंद्र पाटिल, राजेश तिवारी के अलावा करीब 300 लोगों ने दोनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। मामले में चंदानी का कहना है कि आरजीए कंपनी ने वर्क फ्रॉम होम का झांसा देकर लोगों को झांसे में लेना शुरु किया था।

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डाउनलोडिंग के रुपए मिलने का दावा

आरोपियों की कंपनी द्वारा कहा जाता था कि डाउनलोडिंग करने पर रुपए मिलेंगे। कंपनी ने रुपए जमा कर कर्मचारियों की आइडी बना दी। लोगों को कुछ महीनों तक से रुपए दिए भी, लेकिन अचानक रुपए देना बंद कर दिए। इसके बाद उन्होंने दबाव बनाना शुरु कर दिया कि 25 फीसदी भुगतान करना होगा। उसके बाद ही रुपए और सैलरी दी जाएगी। शक होने पर लोग साउथ तुकोगंज स्थित कार्यालय पहुंचे तो कर्मचारियों ने बताया कंपनी के कर्ताधर्ता कार्यालय बंद कर भागने की तैयारी में है। कुछ ही देर में लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने आरोपी यश जैन और प्रीति जैन को घेर लिया। दोनों ने नेहरु पार्क में बैठक के लिए बुलाया और अचानक पुलिसकर्मी भी आ गए।

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UK की कंपनी बताते थे आरोपी

पुलिस ने यश और प्रीति को हिरासत में लिया और एफआइआर दर्ज कर ली। पीड़ितों ने पुलिस को बताया आरोपी यूके की कंपनी बताते थे। कर्मचारियों से कहा कि, एक डाउनलोडिंग पर 12 हजार रुपए दिए जाते हैं। जबकि, उन्हें एक डालर मिलता है। आरोपी क्यूआर कोड भेजकर अलग-अलग खातों में रुपए जमा कराते थे।