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इंदौर की वर्षा सिरसिया ने रचा इतिहास, चार दिन में बनाई 6075 स्क्वेयर फीट लंबी रंगोली

वर्षा का कहना है कि, उन्होंने इस रंगोली को शहर में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन को समर्पित किया है।

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इंदौर की वर्षा सिरसिया ने रचा इतिहास, चार दिन में बनाई 6075 स्क्वेयर फीट लंबी रंगोली

कहते हैं, अगर कोई व्यक्ति किसी लक्ष्य को हासिल करने की ठान ले तो संभव ही नहीं कि, उसे उस लक्ष्य की प्राप्ति न हो। शर्त ये है कि, लक्ष्य हासिल करने वाले का हौसला कितना ? इसी कहावत को चरितार्थ किया है मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर में रहने वाली रंगोली आर्टिस्ट वर्षा सिरसिया ने। वर्षा ने अपने हुनर के दम पर शहर में एक विशालकाय रंगोली बनाई है। हालांकि, वर्षा का कहना है कि, उन्होंने इस रंगोली को शहर में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन को समर्पित किया है।

आपको बता दें कि, शहर में रहने वाली रंगोली आर्टिस्ट वर्षा सिरसिया ने एक नायाब नवाचार अथक मेहनत के दम पर एक विशालकाय रंगोली का रूपांतरण किया है। वर्षा ने इस बार लीक से हटकर अपनी रंगोली के जरिए लोक कलाओं को रंग दिया है। वर्षा ने करीब 6 हजार 75 स्क्वेयर फीट लंबी एक विशालकाय रंगोली में मधुबनी, गौंड, वरली और राजस्थानी लोक कलाओं को प्रदर्शित किया है। इसके साथ संस्कार भारती को समर्पित एक हिस्सा भी है। भव्यता लिए हुए ये रंगोली देखने में अदभुत और अलौकिक नजर आ रही है।

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रंगोली बनाने में किया गया 616 किलो रंग का इस्तेमाल

रांगोली कलाकार वर्षा सिरसिया का कहना है कि, एक से अधिक लोक कलाओं पर आधारित इस तरह की विशाल रंगोली इसके पहले किसी ने नहीं बनाई है। इस थीम पर रंगोली बनाने का विचार उनके मन में लंबे समय से था। लेकिन, लंबी रिसर्च और प्रयासों के बाद अब जाकर वो इसे आकार दे सकी हैं। ये रांगोली उन्होंने चार दिन और तीन रातों की अथक मेहनत के बनाई है। इस 6 हजार 75 स्क्वेयर फीट लंबी विशालकाय रांगोली को बनाने में 616 किलो रंग की जरूरत पड़ी है। खास बात ये है कि, इस विशाल काय रंगोली को उन्होंने अकेले ही आकार दिया है। आपको बता दें कि, इस विसालकाय रांगोली को उन्होंने शहर के गांधी हॉल परिसर स्थित अधूरे मल्टीलेवल पार्किंग की छत पर बनाया है।


ये है वर्षा सिरसिया का सपना

इस विशालकाय रंगोली को बनाने में कितनी मेहनत लगी होगी, इस बात का अंदाजा इसी उदाहरण से लगाया जा सकता है कि, रंगोली निर्माण की शुरुआत के बाद वर्षा ने खाना, पीना, सोना समेत अन्य जरूरी कार्यों को ही भुला दिया था और सब कुछ भूलकर उन्होंने रंगोली के जरिए कलाकृति का निर्माण किया है। जब तक रंगोली पूरी तरह नहीं बन गई, उन्होंने किसी और कार्य के बारे में नहीं सोचा। वहीं, इस लोक कलाओं पर आधारित विशाल रंगोली को संस्था वर्ल्ड रिकॉर्ड कम्युनिटी द्वारा विश्व रिकॉर्ड के बतौर मान्यता दी गई है। इसका सर्टिफिकेट वर्षा को प्रदान रक दिया गया है। वहीं, वर्षा का सपना है कि, इस विशाल रंगोली के जरिए वो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम दर्ज करा सकें।

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प्रवासी भारतीय सम्मेलन को समर्पित

आपको बता दें कि, इससे पहले भी वर्षा सिरसिया कई बार बड़ी और खूबसूरत रंगोलियां बना चुकी हैं। बीते सालों में क्रिश्चियन कॉलेज और गांधी हॉल में भी उन्होंने कारगिल के शहीदों को समर्पित रांगोली बनाई थी। वहीं, वर्षा ने इस छह हजार स्क्वेयर फीट से अधिक की इस रांगोली को आगामी जनवरी महीनें में होने वाले प्रवासी भारतीय सम्मेलन को समर्पित किया है।

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