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जब हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछ लिया इतना कठिन सवाल…

विकलांगों को नौकरी देने से जुड़े सीपीसीट टेस्ट के नियमों की विसंगति को लेकर याचिका दायर  

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जब हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछ लिया इतना कठिन सवाल...

जब हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछ लिया इतना कठिन सवाल...

इंदौर. विकलांगो को शासकीय नौकरी हासिल करने के लिए होने वाले कम्प्यूटर से जुड़ी सीपीसीटी (कम्प्यूटर प्रोफिसिएंसी सर्टिफिकेशन टेस्ट) में विसंगतियों को लेकर हाई कोर्ट में दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। जस्टिस वंदना कसरेकर की एकल पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि जब केंद्र सरकार के सबसे बड़े विभागों शामिल रेलवे में हाथ से विकलांगों को नौकरी देने में सीपीसीटी से छूट दी गई है तो फिर राज्य सरकार मप्र में क्यों यह लिया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा जब 2014 के पहले तक इससे छूट थी तो फिर क्यों नियमों में बदलाव किए गए हैं। कोर्ट ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। 6 दिसंबर को याचिका पर अगली सुनवाई होगी। एडवोकेट मितेश जैन ने शहर के विकलांग कपिल सिंघल के लिए यह याचिका दायर की है। पिछले करीब चार साल में वे कई शासकीय नौकरियों के लिए प्रयास कर चुके हैं। हाथ से विकलांग होने के कारण वे सीपीसीटी में पास नहीं हो पा रहे हैं और उन्हें नौकरी नहीं मिल रही है। जैन के मुताबिक 2014 के पहले हाथ से विकलांग लोगों को सीपीसीटी से छूट थी, लेकिन उसके बाद सरकार ने नियम बदल दिए हैं। इस टेस्ट में विकलांग लोगों को एक सहयोगी तो दिया जाता है लेकिन उसे टाइपिंग करने की अनुमति नहीं होती है। अब जिस परीक्षार्थी के हाथों में विकलांगता है वह कैसे कम्प्यूटर टाइपिंग कर सकता है। नियमों की इस विसंगति के चलते प्रदेश के कई विकलांग शासकीय नौकरी से वंचित हैं। हमने नियम में बदलाव कर हाथों से विकलांगों को सीपीसीटी से छूट दिलाने की मांग की है।