
HIV risk of unborn child-pregnant women increased
निधि अवस्थी@ इंदौर. AIDS एक लाइलाज बीमारी है और छोटी छोटी हेल्थ प्रॉब्लम को इग्नोर करना भी आपको परेशानी में डाल सकता है। शरीर के किसी हिस्से में खुजली होना या फिर गला खराब होना जैसी बातें भी इस भयानक बीमारी की लक्षण हो सकती है। जाने अनजाने में इसे इग्नोर करना भी बहुत महंगा पड़ सकता है। पिछले कुछ सालों में AIDS के मरीजों की संख्या में कुछ कमी तो आई है लेकिन अभी भी नए मरीज मिलते जा रहे हैं। बात अगर इंदौर की करें तो एक साल में यहां एड्स के 513 नए मरीज मिले हैं। यह आंकड़े AIDS कंट्रोल सोसायटी ने जारी किए हैं जो बताते हैं कि आज भी लोग इस बीमारी के चंगुल में फंसते जा रहे हैं। आइए जानते हैं वे कौन सी सामान्य सी दिखने वाली हेल्थ प्रॉब्लम्स हैं जो एड्स की शुरुआत हो सकती हैं।
क्या आप जानते हैं कि एड्स की वजह से स्किन और माउथ में बहुत इंफेक्शन बढ़ जाते हैं। शायद नहीं जानते होंगे। लेकिन यह सच है कि AIDS जैसी गंभीर बीमारी में स्किन पर भी बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। HIV पैशेंट में रैशेस, ड्रायनेस और इचिंग जैसी समस्याएं पूरी बॉडी में देखने को मिलती हैं। यदि पहले ही कोई स्किन प्रॉब्लम हो तो वो भी बहुत बढ़ जाती है।
1- ओरल थ्रश (Oral thrush)- HIV के मरीजों में यह सबसे कॉमन इंफेक्शन माना जाता है। यह यीस्ट की वजह से होता है जिसे केंडिड फंगस कहते हैं। यह ज्यादातर मुुंह में क्रीमी लेयर की तरह फैलता है जो कि जीभ के आसपास और गाल के अंदर या मुंह के ऊपरी हिस्से में होता है। इसकी वजह से दर्द और ब्रश करने में तकलीफ भी होती है।
ट्रीटमेंट- इसके लिए आप डॉक्टर की सलाह से एंटीफंगल सोल्यूशन्स यूज कर सकते हैं। साथ ही नमक के हल्के गर्म पानी से गार्गल करेंगे तो फायदा होगा।
2- ओरल हेयरी ल्यूकोपालकिया (Oral hairy leukoplakia)- जीभ के किनारों पर थिक चिकनी सी लेयर जमना शुरू हो जाती है। साथ ही वहीं पर ही बालों के जैसे घाव भी होने लगते हैं। इसे एप्सटीन बर्र वायरस कहते हैं। इससे दर्द नहीं होता।
ट्रीटमेंट- इसके लिए डॉक्टर रेग्युलर एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट देते हैं।
3- मोल्लुस्कुम कॉन्टेगियोस्म ( Molluscum contagiosum)- यह कॉन्टेगियस वायरस इंफेक्शन होता है। यह चिकना पर्ल व्हाइट या फ्लेश कलर के धब्बे जैसा त्वचा में बॉडी के किसी भी पार्ट में हो जाता है।
ट्रीटमेंट- यह इंफेक्शन मरीज की इम्यूनिटी के बढऩे से अपने आप ठीक हो जाता है या फिर इसके लिए कभी कभी डॉक्टर एंटीवायरल मेडिकेशन दे सकता है।
4- हरपीस वॉयरस ( Infections caused by herpes virus)- HIV के मरीजों में सबसे ज्यादा देखे जाने वाला इंफेक्शन हरपीस वायरस ही है। यह दो प्रकार का होता है। पहला यह मुंह के पास होता है जो ठंड के जैसा दर्द करता है। दूसरा मरीज के प्रायवेट पार्ट के आस-पास होता है। जिसे जेनिटल हरपीस कहते हैं।
ट्रीटमेंट- दोनों ही प्रकारों में टोपिकल और एंटीवायरल के साथ एंटीबायोटिक्स दी जाती है।
5- शिंगल्स ( Shingles ( also known as herpes zoster))- इसे हरपीस जोस्टर्स भी कहते हैं। यह चिकनपॉक्स वायरस की तरह ही होता है जो कि बचपन से बॉडी में मौजूद होता है। यह इम्यूनिटी के कमजोर होने पर या स्ट्रेस की वजह से होता है। यह वायरस नर्व सेल्स में होता है जिसके कारण नर्व डिस्ट्रीब्यूशेन होने लगता है। मल्टीपल नर्व HIV मरीज में आसानी से देखी जा सकती है। इसमें मरीज को बहुत ही तेज दर्द होता है।
ट्रीटमेंट- एंटीवायरल दवाईयों से इसे ठीक करने की कोशिश की जाती है। इसके अलावा पेनकिलर भी दी जाती है।
6- सोरायसिस ( Psoriasis)- यह बहुत ही कॉमन बीमारी होती है इसमें स्किन पर लाल-लाल घाव हो जाते हैं खास कर सिर, कोहनी, घुटने, स्केल्प, नाखून और कमर के नीचे के हिस्से में।
ट्रीटमेंट- इसे स्टेरोयड क्रीम्स, विटामिन डी मेडिसिन और फोटोथैरेपी से ठीक करते हैं।
36 फीसदी की कमी आई
HIV संक्रमण के मामलों में करीब 36 फीसदी की कमी आई है। इस साल अक्टूबर तक यहां कुल 513 एचआईवी संक्रमण के मामले सामने चुके हैं। इंदौर में वर्ष 2015 में इंफेक्शन का प्रतिशत 0.8, 2016 में 0.78 व 2017 में 0.79 है। एमवाय हॉस्पिटल के एआरटी सेंटर के मुताबिक वर्तमान में इंदौर में लगभग 5 हजार HIV पेशेंट हैं। इनमें 55 प्रतिशत पुरुष व शेष महिलाएं हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा मरीज इंदौर में ही हैं। वहीं, ग्वालियर में संक्रमण का स्तर सबसे ऊपर है। यहां इस साल अब तक 266 संक्रमण के मामले 31 हजार टेस्ट के बाद सामने आए हैं। इस हिसाब से यहां संक्रमण का प्रतिशत 0.84 है।
वर्ष जांच पॉजिटिव
2015 83467 667
2016 84390 661
2017 54002 513
Updated on:
01 Dec 2017 10:30 am
Published on:
01 Dec 2017 10:26 am
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