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संसार की सबसे अच्छी कविता है औरत

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अभ्यास मंडल की परिचर्चा और सम्मान समारोह

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इंदौर

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Hussain Ali

Mar 07, 2019

indore

संसार की सबसे अच्छी कविता है औरत

इंदौर. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अभ्यास मंडल ने बुधवार की शाम प्रेस क्लब में परिचर्चा और सम्मान समारोह का आयोजन किया। इस परिचर्चा में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही महिलाओं ने महिला सुरक्षा मेरी दृष्टि विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। अधिकतर वक्ताओं का कहना था कि महिला को खुद ही अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर आगे बढऩा होगा। इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्णा अग्निाहोत्री का सम्मान भी किया गया।

कवियत्री रश्मि रमानी ने अपनी बात को विस्तार देते हुए अपनी कविता पढ़ी, औरत नहीं जानती अपने औरत होने का अर्थ जिसमें अंतिम पंक्ति में कहा गया कि संसार की सबसे अच्छी कविता है औरत। रश्मि रमानी ने कहा कि हम एक विरोधाभासी देश में रहते हैं। एक और देवियां पूजी जाती हैं और वहीं पर्वतों पर विराजी देवियां भी देवताओं द्वारा सताई गई हैं। हमारे देश में सुदूर असम से लेकर कर्नाटक तक एेसी परंपराएं जिनके जरिए स्त्री को सताया जाता है। स्त्री और पुरुष समाज के रथ के बराबर के पहिए हैं अगर एक भी कमजोर हुआ तो समाज चलेगा कैसे।

अधिवक्ता विनीता राज ने कहा कि यूरोप की महिलाओं और मुस्लिम देशों की महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार पाने के लिए हाल के वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। भारत में वैदिक काल में यज्ञ तब तक पूर्ण नहीं होता था जब तक कि महिला उसमें पुरुष के साथ न बैठे। उन्होंने अपना निजी अनुभव बताते हुए कहा कि उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में महिलाओं का सम्मान अधिक है। वरिष्ठ पत्रकार श्रुति अग्रवाल ने कहा, महिला दिवस मनाने की परिपाटी खत्म हो जाना चाहिए क्योंकि इससे एेसा लगता है जैसे महिलाएं कमजोर हैं।

डॉक्टर रुचिता व्यास ने कहा कि जब तक महिलाएं खुद को कैपेबल नहीं समझेंगी तब तक कोई और उन्हें कैपेबल नहीं बना सकता। डॉ. पूनम सिंह ने शिशु ***** अनुपात में लड़कियों की संख्या में लगातार गिरावट हो रही है। ३० साल पहले देश में एक हजार लडक़ों पर १९६२ लड़कियां थी वे अब घट कर प्रतिहजार पर ९१२ रह गई हैं। यह कमी ***** जांच पर तमाम पाबंदियों के बावजूद है। जब किसी महिला का बार- बार गर्भपात करवाया जाता है तो यह उसका गंभीर शारिरिक शोषण और प्रताडऩा है। डॉ. पूनम माथुर ने कहा कि एमवाय अस्पलात में उन्हें जब चार महीने की बालिका के बलात्कार की जांच करना पड़ी तब वे कई दिनों तक ठीक से सो नहीं पाईं। समाज मैं नैतिकता का स्तर किसी कानून से नहीं बल्कि परिवारिक संस्कारों से ही ठीक होगा। परिवार में लडक़ों को नैतिक आचरण सिखाया जाए।

हम योग्यता खो रहे हैं
कार्यक्रम के अंत में अभ्यास मंडल के संस्थापक मुकुंद कुलकर्णी और प्रेस क्लब अध्यक्ष अरविंद तिवारी ने वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री को सम्मानित किया। सम्मान पत्र का वाचन हरेराम वाजपेयी ने किया। सम्मान के उत्तर में उन्होंने कहा कि इस दौर में हम अपनी ईष्र्या के चलते श्रेष्ठता और योग्यता को खोते जा रहे हैं। इस मौके पर सफाई में शहर को नंबर लाने वाली सफाईकर्मी अनिता चांवरे, राधा, सारिका, अनीता, नंदा और दरोगा नवीन पंचवाल को भी सम्मानित किया गया।