
Indore News : जिस नाले में हुई थी कुश्ती, अब पसरी गाद-गंदगी
इंदौर. नगर निगम ने नदी-नालों में साफ और शुद्ध पानी बहने का सपना दिखाया, जो नाला टेपिंग का काम पूरा होने के बावजूद टूट गया। करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद नदी-नालों में काला और गंदा पानी ही नजर आ रहा है, जिसने निगम के काम करने की पोल खोलकर रख दी है। पंचकुइया के पास श्रीराम मंदिर के यहां जिस नाले को सुखाकर निगम अफसरों ने पहलवानों की कुश्ती करवाई थी, अब उसी श्रीराम मंदिर घाट के यहां गंदा पानी बहने के साथ कचरा जमा हो गया है, जो निगम की लापरवाही उजागर कर रहा है।
शहर के बीच बहने वाली कान्ह, सरस्वती और फतनखेड़ी नदी सहित छह बड़े नालों में गिरने वाले ड्रेनेज के गंदे पानी को नाला टेपिंग के जरिए रोका गया। सार्वजनिक 1746 और घरेलू 5624 ड्रेनेज के आउटफाल्स बंद किए गए। निगम ने ये आउटफाल्स बंद करके पिछले वर्ष वाटर प्लस सर्वे में अव्वल आकर पूरे देश में वाहवाही लूटी। साथ ही नदी-नालों में साफ पानी बहने का दावा अलग किया, जो अब फेल होता नजर आ रहा है। कान्ह-सरस्वती नदी के कई हिस्सों में पानी कम नजर आने के साथ गंदगी और कचरा अलग भरा पड़ा रहता है।
पंचकुइया के पास श्रीराम मंदिर घाट के यहां जमा कचरा और गंदगी ने नदी-नाला सफाई की पोल खोलकर रख दी है। यहां नाले के सूख जाने पर निगम अफसरों ने पहलवानों की कुश्ती करवाई थी। इसके अलावा निगम अफसरों ने बैठक करने के साथ नाश्ता भी किया था। नाले में बरसात और सिरपुर तालाब का पानी आता है। इस पर थोड़े दिन ध्यान दिया गया, बाद में सफाई को लेकर लापरवाही बरती जाने लगी। नतीजतन श्रीराम मंदिर घाट के यहां गदंगी व कचरा नजर आने लगा है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष वाटर प्लस का तमगा हासिल करने के लिए निगम अफसरों ने नाला टेपिंग का काम ऐसे किया था कि शहर के अधिकतर नाले सूख गए। निगम द्वारा शहर के लोगों में यह भरोसा पैदा किया गया कि यह काम इतने बेहतर तरीके से हुआ कि नाले में ड्रेनेज का पानी आना बंद हो गया है। इसके परिणाम बरसात बाद शुद्ध और साफ पानी बहने के रूप में मिलेंगे, लेकिन उल्टा हुआ। अब नदी-नालों में कचरा व गंदा पानी दिख रहा है।
यहां नजर आ रही गंदगी व गाद
कान्ह-सरस्वती नदी जिन क्षेत्रों में बहती है, उनमें हरसिद्धि, चिडिय़ाघर के सामने, संजय सेतु, जवाहर मार्ग से चंद्रभागा पुल, गणगौर घाट के पास, मच्छी बाजार क्षेत्र, कर्बला पुल के सामने और कृष्णपुरा से रामबाग पुल के बीच आदि क्षेत्र आते हैं। इनमें से कई जगहों पर गंदगी के साथ गाद और जलकुंभी भरी नजर आती है। इसकी सफाई को लेकर निगम ने पिछले दिनों अभियान चलाया, जो दिखावा ही साबित हुआ। सवाल यह है कि कान्ह-सरस्वती नदी में साफ पानी बहने के बजाय आखिरकार ऐसा क्या हुआ पूरा दृश्य बदल गया? क्या कारण है कि यहां पर गंदगी व कचरे का अंबार दिखने लगा? नाला टेपिंग के बावजूद आखिर क्यों नदी में काला और गंदा पानी नजर आ रहा है? ऐसे कई सवाल हैं, लेकिन इनका कोई जवाब जिम्मेदार अफसरों के पास नहीं है, क्योंकि नाला टेपिंग के कामकाज में हुई गड़बड़ी पिछले वर्ष की बरसात के दौरान ही निकल कर सामने आना शुरू हो गई थी।
बरसात में हो जाएगा सब साफ
कान्ह-सरस्वती नदी में जमी गाद निकलने में अभी दो से तीन वर्ष लगेंगे। नदी-नालों में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का साफ पानी छोड़ा जा रहा है। रही बात पंचकुइया के पास श्रीराम मंदिर घाट के यहां कचरा व गंदगी जमा होने की, तो उसकी सफाई करवा दी जाएगी। वैसे बरसात के चलते नदी-नालों में थोड़ा-बहुत कचरा व जलकुंभी आती है, जो भारी बारिश होने पर बह जाता है।
- सुनील गुप्ता, कार्यपालन यंत्री, ड्रेनेज एवं जल यंत्रालय विभाग
Published on:
25 Jun 2022 11:39 am
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