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यंगस्टर्स में छाया सरकारी कॉलेज का क्रेज, BA से लेकर B.SC तक में 80% सीटें हो रहीं फुल

कोर्सेस की 80 फीसदी तक सीट पहले ही चरण की काउंसलिंग में अलॉट होने के आसार है....

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इंदौर। प्रदेशभर के सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त कॉलेजों में दाखिले के लिए ऑनलाइन काउंसलिंग शुरू हो चुकी है। इस बार ज्यादातर स्टूडेंट की चाह सरकारी कॉलेजों की है। बीए से लेकर बीएससी तक के लिए स्टूडेंट चॉइस फिलिंग में सरकारी कॉलेजों को ऊपर रख रहे हैं। इसे देखते हुए प्रमुख कोर्सेस की 80 फीसदी तक सीट पहले ही चरण की काउंसलिंग में अलॉट होने के आसार है। वहीं, इनके बाद अल्पसंख्यक कॉलेज प्राथमिकता पर है।

ऑनलाइन काउंसलिंग के पहले चरण के शुरुआती दौर में रजिस्ट्रेशन बेहद धीमी गति चल रही है। इस बार यूजी की 7 लाख 18 हजार 189 और पीजी की 1 लाख 69 हजार 18 सीट पर प्रवेश होना है। पहले चरण में यूजी के लिए रजिस्ट्रेशन का मौका 12 जून तक है। अब तक सिर्फ 19131 ने ही रजिस्ट्रेशन कराए। इनमें भी दस्तावेज का सत्यापन कराने वालों की संख्या 8999 है। पहले चरण में ज्यादातर विद्यार्थियों का झुकाव सरकारी कॉलेजों की ओर है। हर तीसरा विद्यार्थी सरकारी कॉलेज में एडमिशन चाह रहा है। इंदौर के कॉलेजों की बात करें तो साइंस स्ट्रीम में होलकर साइंस कॉलेज टॉप पर है। इसके बाद निर्भयसिंह कॉलेज को भी विकल्प के तौर पर चुन रहे हैं।

फिर अल्पसंख्यक में ही मिलेगा मौका

इंदौर में गुजराती समाज, क्रिश्चियन कॉलेज, रेनेसां, जैन दिवाकर, विशिष्ट, इस्बा एलेक्जिया, अरिहंत, आइआइएल, जैन दिवाकर, इंदौर इंटरनेशनल सहित 38 अल्पसंख्यक कॉलेज हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने इन कॉलेजों की काउंसलिंग के नियमों में बदलाव किए हैं। पहले चरण में 1:1 के रेशों में सीट अलॉट होगी। हालांकि, दूसरे चरण से सीएलसी होगी, जिसमें कॉलेज अपने स्तर पर सीधे एडमिशन दे सकेंगे। यानी जिस विद्यार्थी को अलॉटमेंट नहीं मिल सकेगा वह इन कॉलेजों में ही मौका पा सकेगा।

जानिए क्या कहते हैं टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. अनस इकबाल, डायरेक्टर, विशिष्टि कॉलेज का कहना है कि बारहवीं पास करने वालों को एडमिशन के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना चाहिए। पहले चरण की काउंसलिंग के बाद हर चरण में मौके कम होते जाएंगे। नई शिक्षा नीति के तहत अपनी पसंद के आधार पर कोर्सेस चुनना आसान हो गया है। ऐसे में अल्पसंख्यक कॉलेजों में भी अच्छे विकल्प हैं।