1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

रविशंकर प्रसाद की बिना जानकारी के जारी कर दिया था DoT ने आदेश

केंद्र सरकार में दूरसंचार मंत्री हैं रविशंकर प्रसाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कैसे हो गई चूक हर मामले में बेबाक टिप्पणी करने में माहिर हैं केंद्रीय मंत्री

3 min read
Google source verification

image

Saurabh Sharma

Feb 15, 2020

Ravi Shankar Prasad

नई दिल्ली। कानून से लेकर देश की वित्तीय स्थिति तक हर चीज में अपनी राय रखने में माहिर हैं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद। मोदी सरकार के दूसरे टेन्योर में तो वो दूरसंचार मंत्री भी है। ऐसे में उनका कद सरकार में काफी बड़ा है। इसलिए उनसे बजट के बारे में, देश की वित्तीय स्थिति के बारे में और रक्षा से जुड़े मामलों में सवाल पूछे जाते हैं तो वो बेबाकी से जवाब देते हैं। अगर उनसे नहीं भी पूछा जाता तब भी वो पार्टी के नेता होने नाते अपनी सरकार को डिफेंड करते नजर आते हैं, लेकिन इस बार उनसे चूक हो गई। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने जब सरकार को एजीआर मामले में फटकार लगाई और कहा कि डेस्क पर बैठा एक अधिकारी कैसे कोर्ट के फैसले के विपरीत आदेश जारी कर सकता है, तब जाकर उन्हें जानकारी हुई कि डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवज्ञा की है।

यह भी पढ़ेंः-AGR Due Case : सरकार और टेलीकॉम कंपनियों को फटकर, एमडी पहुंचेंगे SC के दरबार

DoT को लगाई थी फटकार, फिर की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम को डांट लगाते हुए पूछा था कि आखिर विभाग ने भुगतान ना करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई ना करने का नोटिफिकेशन जारी किया कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विभाग में बैठा डेस्क अधिकारी अटॉर्नी जनरल और अन्य संवैधानिक प्राधिकरणों को पत्र लिखकर कैसे बोल सकता है कि टेलीकॉम कंपनियों पर भुगतान के लिए जोर नहीं दिया जाना चाहिए। क्या सरकारी विभाग का अफसर सुप्रीम कोर्ट से भर बड़ा हो गया है? अगर ऐसा है तो कोर्ट को बंद कर दीजिए। कोर्ट ने परेशानी भरे लहजे में कहा कि एजीआर मामले में समीक्षा याचिका खारिज कर दी, लेकिन इसके बाद भी एक भी पैसा जमा नहीं हुआ। देश में जिस तरह से चीजें हो रही हैं, इससे हमारी अंतरआत्मा हिल गई है।

यह भी पढ़ेंः-सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद DoT ने टेलीकॉम कंपनियों को बकाया रकम चुकाने के दिए आदेश

नहीं थी केंद्रीय मंत्री और सचिव को जानकारी
सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद जो बात सामने आई है वो बेहद चौंकाने वाली हैै। दूरसंचार विभाग का एजीआर बकाए के भुगतान में चूक करने वाली कंपनियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद और सचिव की सहमति के बिना जारी किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले ने ना तो केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को जानकारी थी, ना ही सचिव को। यह कोई नई बात नहीं कि कई विभागों के अधिकारी संबंधित विभाग के मंत्री को बिना बताए आदेश जारी कर देेते हैं, लेकिन जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन बेंच की पीठ सुनवाई कर रही हो और उसने एजीआर मामले में सख्त रुख अपना रखा हो, तो क्या केंद्रीय मंत्री को ऐसे मामलों में आंख, नाक, कान खोलकर नहीं रखनी चाहिए। इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद मौजूदा सरकार कानून मंत्री भी है। वो अच्छे से जानते हैं सुप्रीम कोर्ट के सख्त रवैए का नुकसान किस तरह से उठाना पड़ सकता है।

यह भी पढ़ेंः-GDP कम, Export कम, ऐसे विकसित देश में Trump आपका Welcome

अब दिए कार्रवाई के आदेश
दूरसंचार विभाग ने समय पर बकाया राशि ना लौटाने को लेकर दूरसंचार कंपनियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई ना करने को लेकर जारी किया आदेश वापस ले लिया है। वहीं कंपनियों को तुरंत बकाया रकम चुकाने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं दूसरी ओर मंत्रालय ऐसे अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है, जिन्होंने कोर्ट के फैसले के खिलाफ आदेश दिया था। अगर एजीआर मामले में सरकार की आंखे खुली होती, संबंधित मंत्री सतर्क और चौकस रहते तो सरकार और विभाग को सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस तरह की फटकार नहीं झेलनी पड़ती।