
नर्इ दिल्ली। आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक-वीडियोकाॅनल लोन केस में चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को आयकर विभाग के जांच विंग ने एक नोटस भेजा है। इस नोटिस में माॅरीशस की एक कंपनी द्वारा नूपाॅवर रिन्यूवेबल प्राइवेट लिमिटेड में निवेश के बारे में पूछा है। विभाग ने अपने जांच में पाया कि, 3250 कराेड़ रुपए की मंजूरी मिलने से ठीक दो हफ्ते पहले इस कंपनी ने नूपावर में 166.53 करोड़ रुपए का निवेश किया है। आयकर विभाग ने अपने जांच में पाया है कि कर्न्वर्टिबल डिबेंचर के रूप में सुप्रीम एनर्जी लिमिटेड ने भी 64 करोड़ रुपए का निवेश किया है। ये वहीं कंपनी है जिसे वीडियोकाॅन के वेणुगोपल धूत ने दीपक कोचर को केवल 9 लाख रुपए में ट्रांसफर किया था। इसे आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक से लोन मिलने के 6 महीने बाद ट्रांसफर किया गया था।
देना होगा परिसंपत्तियाें के निपटान का विवरण
दीपक कोचर को भेजे गए इस नोटिस में 10 अप्रैल तक उन सभी सहायक दस्तावेजों को जमा करने को कहा गया है, जिसमें 2014 से 2016 के बीच नूपावर रिन्यूवेबल लिमिटेड द्वारा करीब 838.81 करोड़ रुपए की परिसंपत्तयों का निपटान किया गया है।इस अवधि में नूपावर आैर उसके दो सहायक कंपनियों के बीच किए गए "मंदी बिक्री समाझौतों" का विवरण भी मांगा गया है। जब कोर्इ भी कंपनी किसी कारणवश अपना पूरा या कुछ हिस्सा ट्रांसफर दूसरे को ट्रांसफर करती है तो उसे मंदी बिक्री समझौता कहा जाता है।
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लोन की पहली किश्त से पहले किया था निवेश
हालांकि इन विवरण में कर जांच को लेकर कोर्इ जानकारी नहीं मांगी गर्इ है। सूत्रों के मुताबिक, मॉरीशस के फर्स्ट लैंड होल्डिंग्स द्वारा 2010 और 2012 के बीच अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय वरीयता शेयरों के रूप में किए गए चार भुगतान की जांच होगी। दरअसल शुरूआती जांच में ये बात सामने आया है कि, फर्स्ट लैंड होल्डिंग्स ने अंतिम बार नूपावर को 21 मार्च 2012 में कुल रकम का कुछ हिस्सा जमा किया था, जबकि आर्इसीआर्इसीआर्इ बैंक के लोन का 650 करोड़ रुपए का पहला हिस्सा 3 अप्रैल 2012 को मिला था। माॅरीशस की कंपनी ने इसके पहले 49 करोड़ रुपए, 8.69 करोड़ रुपए आैर 99.25 करोड़ रुपए का तीन हिस्सों में पैसों को भुगतान किया था।
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इन जानकारियों का भी देना होगा विवरण
वर्ष 2010 से 2016 के बीच में नूपावर को शेयरहोल्डिंग आैर फंडिग के अलावा , दीपक कोचर को फर्स्ट लैंड होल्डिंग्स लिमिटेड और डीएच रिन्यूवेबल होल्डिंग्स लिमिटेड के बारे में गतिविधि की प्रकृति, निगमन विवरण, प्रमोटरों के विवरण और निवेश के लिए बोर्ड के प्रस्ताव का विवरण भी भेजने को कहा गया है। ये दाेनों कंपनियां भी माॅरीशस में आधारित हैं। कोचर से पूछा गया है कि कैसे वो इन दाेनों कंपनियों के संबंध में आए। यहीं नहीं उनसे इन दोनों कंपनियों से हुर्इ बातचीत का ट्रांसक्रीप्ट जिसमें र्इ-मेल, मीटिंग्स जैसे विवरण शामिल होंगे। टैक्स अधिकारियों ने दोनों कंपनियों के बीच हुए सहमति दस्तावेज को भी मांगा है।
Published on:
08 Apr 2018 11:10 am
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