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सितम्बर में विनिर्माण क्षेत्र ने गति पकड़ी, 52.2 पर पहुंचा पीएमआई सूचकांक

सितंबर में लगातार 14वें महीने में पीएमआई सूचकांक में तेजी रही है।

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सितम्बर में विनिर्माण क्षेत्र ने गति पकड़ी, 52.2 पर पहुंचा पीएमआई सूचकांक

नई दिल्ली। उत्पादन और नए ऑर्डरों के, विशेषकर विदेशों से मिले ऑर्डरों के गति पकड़ने से देश के विनिर्माण क्षेत्र में सितम्बर में तेजी देखी गई है। इससे निक्केई का विनिर्माण खरीद प्रबंधकों (पीएमआई) का सूचकांक बढ़कर 52.2 पर पहुंच गया है। यह लगातार 14वां महीना है जब विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आई हैं। अगस्त में पीएमआई सूचकांक 51.7 रहा था। सूचकांक का 50 से ऊपर रहना गतिविधियों में वृद्धि को दर्शाता है, जबकि इसका 50 से कम रहना मंदी का द्योतक है। सूचकांक का 50 पर होना गतिविधियों में स्थिरता दर्शाता है।

विनिर्माण क्षेत्र में नए रोजगार भी मिले

निक्केई की ओर से सोमवार को मुंबई में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि नए ऑर्डरों और उत्पादन के साथ विनिर्माण क्षेत्र में सितम्बर में नए रोजगार भी मिले। कंपनियों ने भविष्य में भी नए ऑर्डर की उम्मीद में कच्चे माल की खरीद बढ़ा दी। रिपोर्ट के अनुसार, ईंधन तथा स्टील के दाम बढ़ने से विनिर्माताओं की लागत भी बढ़ी और उन्होंने बदले में अपने उत्पाद महंगे किए। बढ़ती लागत से धारणा कुछ कमजोर हुई है। इसके बावजूद कंपनियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग और फलस्वरूप उत्पादन बढ़ेगा।

लागत की तुलना में कंपनियों ने कम कीमत बढ़ाई: विशेषज्ञ

निक्केई के लिए रिपोर्ट तैयार करने वाली एजेंसी आईएचएस मार्किट के अर्थशास्त्र निदेशक तथा रिपोर्ट के लेखक पॉल स्मिथ ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र में विकास की दर बढ़ी है जो मांग में मजबूती दर्शाता है, विशेषकर विदेशों से आने वाली मांग में। इससे निर्यात इस साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। स्मिथ ने कहा कि सितंबर में कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है। इसमें स्टील तथा ईंधन की कीमतों के साथ डॉलर की तुलना में कमजोर रुपए का भी योगदान रहा है। इसके बावजूद कंपनियों ने लागत की तुलना में उत्पाद मूल्य कम बढ़ाए हैं।