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कालेधन से लड़ार्इः मोदी सरकार ने तैयारी की नर्इ रणनीति, इन लोगों के लिए बचना होगा मुश्किल

पिछले साल ही एक एनलिटिकल कंपनी ने अपने तरफ से जारी आकंड़ों में कहा था कि कोलकाता के 09/12 लाल बाजार में अलग अलग ब्लाॅक में करीब 1410 कंपनियां रजिस्टर्ड हैं।

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कालेधन से लड़ार्इः मोदी सरकार ने तैयारी की नर्इ रणनीति, इन लोगों के लिए बचना होगा मुश्किल

नर्इ दिल्ली। बीते जुलार्इ को जब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के अधिकारियों ने हैदराबाद के एक जुबली हिल्स एरिया में छापा मारा तो पता चला कि एक ही कमरे से 25 लोग मिलकर 114 कंपनियां चला रहे हैं। इसमें से अधिकतर इकाइयों को एक ही परिवार को लोग चला रहे थे। ये कोर्इ अाम परिवार नहीं था बल्कि उसी बी रामलिंगा राजू के परिवार के सदस्य थे जो देश के सबसे बड़े काॅर्पोरेट फ्राॅड में शामिल थे। ये फ्राॅड था 'सत्यम घोटाला'। ये भारत का कोर्इ एक मामला नहीं है। कोलकाता भी इसी तरह की मुखौटा कंपनियों (शेल कंपनियां) का गढ़ कहा जाता है। मुखौटा कंपनियों के आंकड़ों की बात करें तो एक ही पते पर सबसे अधिक कंपनियों के रजिस्ट्रेशन के मामले में कोलकाता देश का पहले नंबर का शहर है।

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क्या होती हैं मुखौटा कंपनियां?
पिछले साल ही एक एनलिटिकल कंपनी ने अपने तरफ से जारी आकंड़ों में कहा था कि कोलकाता के 09/12 लाल बाजार में अलग अलग ब्लाॅक में करीब 1410 कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। एक ही ब्लाॅक के कमरा संख्या 10 पर 84 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। इस एरिया में 148 पतों पर कुल 11,281 कंपनियां रजिस्टर्ड थीं। अगर देखें तो औसतन एक पते पर करीब 76 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन। अामतौर पर इन मुखौटा कंपनियों को "लेटरबाॅक्स कंपनी" भी कहा जाता है। ये कंपनियों केवल कागजों पर होती हैं। इस तरह की कंपनियों को मनी लाॅन्ड्रिंग, लेनदेन की फर्जी बिल बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये कंपनियां लेनदेन की अपनी जटिल प्रक्रिया से दूसरी कंपनियों को टैक्स बचत करने में भी मदद करती हैं।

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मोदी सरकार ने खोजा स्मार्ट तरीका
लेकिन इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवार्इ वाली एनडीए सरकार ने इन कंपनियों को सबक सिखाने के लिए एक बेहद ही स्मार्ट तरीका खोज निकाला है। मोदी सरकार का ये खास तरीका है - जियो टैगिंग। आने वाले दिनों में कार्पोरेट मामले से जुड़ा मंत्रालय इन कंपनियों से RoC में फाइलिंग के दौरान लोकेशन की जियो टैगिंग करने को कह सकता है। इससे सरकार को उन मामलों के बारे में पता लगाने में आसानी होगी जहां एक ही पते पर सैकड़ों कंपनियां रजिस्ट्रर्ड हैं।

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क्या हैं नियम?
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एमबी शाह की अध्यक्षता वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआर्इटी) ने सरकार को साल 2015 में ही कहा था कि उन कंपनियों आैर निदेशकों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है जिनका एक ही पता है। एसआर्इटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, "कर्इ तरह के हार्इ-प्रोफाइल मामलों में मनी लाॅन्ड्रिंग के लिए मुखौटा कंपनियों की संलिप्तता को पाया गया है। इनमें से कर्इ मामलों पर बीते कुछ समय से जांच चल रही है।" हालांकि, एक ही पते पर कर्इ कंपनियों के रजिस्ट्रशन की बात करें तो इसमें नियमों का उल्लंघन नहीं है। इसकी कोर्इ तय सीमा नहीं है कि एक ही पते पर आखिर कितनी कंपनियां रजिस्टर्ड हो सकती हैं। लेकिन सरकार का मानना है कि इन कंपनियों में से अधिकतर कंपनियों का इस्तेमाल मनी लाॅन्ड्रिंग में किया जाता है। जियो टैगिंग से इन कंपनियों के बारे में सरकार को अासानी से पता लगता रहेगा आैर उनकी नजर इन पर बनी रहेगी।

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मुखौटा कंपनियों से मोदी सरकार की जंग
गौरतलब है कि बीते चार साल में पीएम मोदी की सरकार मुखौटा कंपनियों के खिलाफ व्यापक स्तर पर लड़ार्इ लड़ रही है। पिछले साल ही काॅर्पाेरेट मामलों से जुड़े मंत्रालय ने कुल 2,50,000 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया था। इन कंपनियों का या तो परिचालन नहीं हो रहा था या फिर टर्नआेवर लगभग शून्य था। कहा जा रहा था कि इनमें से अधिकतर मुखौटा कंपनियां थीं। सूत्रों के अनुसार, इस साल भी करीब इतनी ही कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा सकता है।

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