
इस दिन से सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल का दाम, ये है बड़ी वजह
नई दिल्ली। ईरान पर 4 नवंबर से अमरीका द्वारा लगाया गया प्रतिबंध लागू हो जाएगा। 4 नवंबर के बाद कोई भी देश ईरान से तेल खरीदता है तो उसे अमरीकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस परिस्थिति से निपटने के लिए भारतीय परिशोधन कंपनियों ने फैसला किया है कि वो कच्चे तेल का भुगतान रुपए में करेगी। इस भुगतान के लिए यूको बैंक और आइडीबीआइ बैंक को मध्यस्थ बनाया जाएगा। इन दोनों बैंकों को भुगतान के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि इनका अमरीकी वित्तीय तंत्र के साथ कोई संबंध नहीं है। हालांकि खबरों के मुताबिक परिशोधन कंपनियों की पहली पसंद यूको बैंक है क्योंकि इससे पहले प्रतिबंधों के दौरान इस बैंक को मध्यस्थ बनाया जा चुका है। भारतीय कंपनियां ही रुपए में भुगतान नहीं करेंगी, ईरान भी आयात के लिए मुद्रा विनिमय के तौर पर रुपए का इस्तेमाल कर सकता है। एेसे में इस बात की उम्मीद की जा सकती है इसके बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल की कीमतों से आम जनता को राहत दे सकती हैं।
भारत जैसे देशों पर र्इरान से तेल आयात शून्य करने पर अमरीका नहीं बनाएगा दबाव
ईरान से तेल निर्यात शून्य करने के लिए अमरीका ने भारत को बड़ी छूट देने का वादा किया है। हालांकि अभी तक अमरीका ने इस पर अंतिम फैसला नहीं किया है। अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान से तेल खरीदने वाले भारत जैसे देशों को छूट देने पर विचार किया जा सकता है। इसके अलावा उन्हें ईरान से तेल आयात तुरंत शून्य करने का दबाव नहीं डाला जाएगा। इसकी बजाय उन्हें अमरीका से छूट पाने के लिए ईरान से आयात में बड़ी कमी करनी होगी और धीरे-धीरे इसे शून्य पर लाना होगा। अमरीका ने प्रतिबंधों का पालन न करने वाले देशों को धमकी दी है कि ऐसा न करने पर उन्हें वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से अलग:थलग कर दिया जाएगा।
र्इरान से 80 फीसदी तेल आयात करता है भारत
भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी तेल आयात करता है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा तेल ईरान से आता है। डायरेक्टरोट जनरल ऑफ कॉमर्शियल इंटेलीजेंस एंड स्टेटेस्टिक्स (डीजीसीआइएस) के आंकड़ो के मुताबिक इराक और सऊदी अरबके बाद सबसे अधिक तेल ईरान से आता है। इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में इराक से 1.2 करोड़ टन और सऊदी अरब से 91.7 लाख टन की तुलना में इराक से 81.4 लाख टन कच्चे तेल का आय़ात हुआ था।
ऊर्जा जरूरतों के लिए र्इरान पर निर्भर रहता है भारत
अमरीकी संसद में एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ईरान पर नए सिरे से लगाए गए प्रतिबंधों का प्रतिरोध कर सकता है। अमरीकी संसद की शोध एवं परामर्श इकाई कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) में कहा गया है कि भारत सिर्फ संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का पालन करता है। इसके अलावा भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान पर निर्भर है। सीआरएस ने अपनी रिपोर्ट में भारत और ईरान की सभ्यता और इतिहास के आपस में जुड़े होने का हवाला देते हुए कहा कि दोनों देश विभिन्न रणनीतिक मुद्दों पर भी एक-दूसरे से संबंधित हैं।
Updated on:
21 Sept 2018 08:18 am
Published on:
20 Sept 2018 08:20 pm
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