15 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रेल मंत्रालय ने 10 सालों में कबाड़ से कमा लिए 35 हजार करोड़ रुपए

रेलवे ने आरटीआई के जवाब में दी पूरी जानकारी कोच, वैगन्स और पटरी के कबाड़ बेचकर कमाए रुपए
2 min read
Google source verification

•

image

Saurabh Sharma

•

Oct 10, 2019

Railway Scrap

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने स्क्रैप बेचकर अपने खजाने में एक बड़ी धनराशि जोड़ी है। रेलवे की तरफ से एक आरटीआई आवेदन के जवाब में जारी ब्यौरे के अनुसार, विभाग ने बीते 10 सालों में स्क्रैप (कबाड़) से 35,073 करोड़ रुपए की आमदनी की है।

रेल मंत्रालय ने बीते 10 सालों में बेचे गए स्क्रैप को लेकर जो ब्यौरा जारी किया है, उससे पता चलता है कि वर्ष 2009-10 से वर्ष 2018-19 की अवधि के बीच विभिन्न तरह के स्क्रैप बेचकर विभाग ने 35,073 करोड़ रुपए कमाए। इसमें कोच, वैगन्स और पटरी के कबाड़ शामिल हैं।

यह भी पढ़ेंः-पेट्रोल 5 और डीजल 6 पैसे प्रति लीटर हुआ सस्ता, आज इतने चुकाने होंगे दाम

मध्य प्रदेश के मालवा-निमांड अंचल के वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता जिनेंद्र सुराना को सूचना के अधिकार के तहत रेलवे बोर्ड द्वारा दिए गए ब्यौरे में बताया गया है कि बीते 10 सालों में सबसे ज्यादा स्क्रैप 4,409 करोड़ रुपए का वर्ष 2011-12 में बेचा गया, जबकि सबसे कम स्क्रैप से आमदनी वर्ष 2016-17 में 2,718 करोड़ रुपए हुई।

यह भी पढ़ेंः-नवरात्र के बाद फिर आसमान चढ़ा प्याज का दाम, 70 रुपए प्रति किलो का छुआ स्तर

रेलवे बोर्ड की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, बेचे गए कबाड़ में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रेल पटरियों की है। वर्ष 2009-10 से 2013-14 के बीच 6,885 करोड़ रुपए के स्क्रैप बेचे गए, वहीं वर्ष 2015-16 से 2018-19 की अवधि के बीच 5,053 करोड़ रुपए के स्क्रैप बेचे गए। कुल मिलाकर 10 सालों में रेल पटरियों का स्क्रैप बेचने से 11,938 करोड़ रुपए की आमदनी हुई।

यह भी पढ़ेंः-अनमोल और अंशुल अंबानी ने रिलायंस इंफ्रा बोर्ड को किया ज्वाइन

सुराना कहते हैं, "रेल पटरी के स्क्रैप से एक बात साफ हो जाती है कि वर्ष 2009-10 से 2013-14 के बीच पांच साल की अवधि की तुलना में वर्ष 2014-15 से 2018-19 के बीच रेल पटरी का स्क्रैप कम निकला है। इससे ऐसा लगता है कि अंतिम पांच साल की अवधि में रेल पटरियों में कम बदलाव हुआ है। अगर रेल पटरी का अमान परिवर्तन होता है तो उसी अनुपात में पुरानी पटरी के स्क्रैप निकलते हैं।"