दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम नहीं इन शहरों की प्रॉपर्टी की कीमत में हुआ इजाफा

जनवरी से मार्च के दौरान दक्षिण भारत में सबसे अधिक ज्यादा प्रॉपर्टी के दाम बढ़े हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुार बेंगलूरू से लेकर चेन्नई तक प्रॉपर्टी की कीमत में 1 फीसदी से लेकर 1.5 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।

By: Saurabh Sharma

Updated: 04 Apr 2021, 06:26 AM IST

नई दिल्ली। जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान देश के दक्षिणी बाजारों में संपत्ति की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार मूल्य के नजरिए से देश के दक्षिणी क्षेत्र में 2021 की पहली तिमाही में निर्माणाधीन और तैयार (रेडी-टू-मूव) दोनों सेगमेंट में सबसे अधिक मूल्य वृद्धि दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान चेन्नई में कीमतें 1.5 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि हैदराबाद और बेंगलुरू में क्रमश: 1.3 प्रतिशत और 1 प्रतिशत की दर से मूल्य वृद्धि हुई है।

उत्तर भारत में कितना इजाफा
पश्चिम भारत की बात की जाए तो यहां सबसे बड़े बाजार मुंबई में महज 1 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है। ठाणे में यह तेजी 2 फीसदी की देखने को मिली है। उत्तर भारत में गुरुग्राम और नोएडा के महत्वपूर्ण बाजारों में क्रमश: 0.7 फीसदी और 1.2 फीसदी की वृद्धि हुई है। जानकारों की मानें तो आने वाले दिनों में प्रॉपर्टी की कीमत में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है।

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सप्लाई में भी तेजी
रिपोर्ट में कहा गया है कि अहमदाबाद और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में समीक्षाधीन अवधि के दौरान भारत की आवासीय अचल संपत्ति में कोविड से पहले के स्तर की अपेक्षा क्रमश: 7 फीसदी और 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है और आपूर्ति अखिल भारतीय स्तर पर 8 फीसदी बढ़ी है। मैजिकब्रिक्स प्रोपइंडेक्स यह भी बताता है कि आवासीय अचल संपत्ति बाजार अब महामारी के प्रभाव से निकल रहा है और लोग अब पहले की अपेक्षा घर खरीदने या किराए पर देने के लिए रूचि दिखा रहे हैं।

क्यों बढ़ें हैं दाम
होम लोन की ब्याज दरों में कमी, स्टांप ड्यूटी में कमी और छूट और डेवलपर्स द्वारा दी जाने वाली छूट भी ऐसे कारक हैं, जिससे घर खरीदने वालों में एक आकर्षण पैदा हुआ है। इसने डेवलपर्स को देश भर में नई परियोजनाएं शुरू करने के लिए भी प्रेरित किया है और हैदराबाद ने आपूर्ति में 20 फीसदी की महत्वपूर्ण वृद्धि के साथ इस क्षेत्र में नेतृत्व किया है। मैजिकब्रिक्स के सीईओ सुधीर पई ने एक बयान में कहा, "वर्ष 2021 की पहली तिमाही ने अर्थव्यवस्था में मजबूत पुनरुद्धार का संकेत दिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2022 में विभिन्न बहुपक्षीय एजेंसियों द्वारा की गई भविष्यवाणियों के अनुसार 10-13 प्रतिशत बढऩे की उम्मीद है।

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