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इटारसी में होगी संत मीरा बाई पर केंद्रित ‘कला धरोहर’ पर दो दिवसीय कार्यशाला

किसान संघ की बैठक में किसानों के मुद्दों पर हुई चर्चा

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Farmers' issues were discussed in the farmers union meeting

किसान संघ की बैठक में किसानों के मुद्दों पर हुई चर्चा

कला धरोहर के लिए पीएम श्री शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय इटारसी का हुआ चयन

इटारसी. भारत सरकार संत मीरा बाई की 525वीं जयंती मना रही है। इस अवसर पर अकादमी ने पूरे भारत में संत मीरा बाई पर केंद्रित 'कला धरोहर' श्रृंखला का आयोजन किया है। इस श्रृंखला की शुरुआत हरियाणा से हुई थी और अब इसे पूरे भारत वर्ष के सरकारी स्कूलों एवं विश्वविद्यालयों में सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है।

इसी तारतम्य में इटारसी के सूरजगंज स्थित पीएम श्री शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को 'कला धरोहर' के लिए चुना गया है। यहां दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन 4 और 5 सितंबर को होगा। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए स्कूल के विधायक प्रतिनिधि जसवीर सिंह छाबड़ा ने बताया कि कार्यक्रम दोपहर 12 से 3 बजे तक प्रतिदिन किया जाएगा। इस कार्यशाला में जबलपुर की प्रसिद्ध कलाकार शलिनी खरे, कथक नर्तक, छात्राओं को संत मीरा बाई पर आधारित कथक नृत्य की बुनियादी बातें सिखाएंगी। उन्होंने कहा कि 'कला धरोहर' श्रृंखला भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रसार के लिए एक अत्यंत प्रशंसनीय कदम है। जो न केवल छात्रों को भारतीय संस्कृति से जोड़ता है, बल्कि उन्हें हमारी समृद्ध धरोहर को समझने और सराहने के लिए भी प्रेरित करता है।

भारतीय प्रदर्शन कलाओं के प्रति छात्रों के ज्ञान को बढ़ाएगा-

संगीत नाटक अकादमी नईदिल्ली भारत की प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में सर्वोच्च संस्था है। जिसकी स्थापना भारत की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार के उद्देश्य से की गई थी। अकादमी विभिन्न आयोजनों, गतिविधियों और उत्सवों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और जमीनी स्तर पर बढ़ावा देती है और उसे व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का कार्य करती है। संगीत नाटक अकादमी ने 'कला धरोहर' श्रृंखला की शुरुआत की है, जो एसएनए की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा एवं सचिव श्री राजू दास की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस श्रृंखला का उद्देश्य भारतीय प्रदर्शन कलाओं के प्रति छात्रों के ज्ञान को बढ़ाना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) का समर्थन करना है। इस पहल के अंतर्गत, छात्रों को भारतीय कलाओं के प्रति जागरूक और निकट लाने के लिए व्याख्यान-प्रदर्शन, कार्यशालाओं और प्रदर्शनों जैसी विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार में योगदान-

'कला धरोहर' श्रृंखला के अंतर्गत संगीत नाटक अकादेमी के पुरस्कार विजेता, प्रख्यात कलाकार, गुरु और विद्वान आमंत्रित किए जाते हैं। जिससे छात्रों को विभिन्न प्रदर्शन कला रूपों के विशेषज्ञों से सीखने का अवसर प्राप्त हो सके। इन संवादात्मक सत्रों का उद्देश्य न केवल छात्रों की भारतीय संस्कृति की समझ को गहरा बनाना है। बल्कि उन्हें हमारे देश की समृद्ध धरोहर को खोजने और सराहने के लिए प्रेरित करना भी है। यह पहल भारतीय प्रदर्शन कलाओं के ज्ञान को फैलाने और युवा प्रतिभाओं को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। 'कला धरोहर' न केवल छात्रों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और प्रचार में भी अहम योगदान दे रही है।