
Former municipal chairman Ravi Jaiswal, BJP's jila mantri Kalpesh Agrawal, jal awardhan, Mehraghat, Itarsi
इटारसी. पिछले दिनों युवक कांग्रेस की ओर से मीडिया समन्वयक अमोल उपाध्याय ने जल आवर्धन को लेकर आरोप लगाया था कि कि अकर्मण्यता और भ्रष्टाचार के चलते यह योजना १४ करोड़ में पूर्ण होने की जगह वर्तमान में इसकी लागत २५ करोड़ तक पहुंच गई है। इसमें अतिरिक्त बजट बढ़ाकर स्थानीय ठेकेदारों को लाभांवित किया गया था साथ ही भ्रष्टाचार भी किया गया है।
इसका जवाब देते भाजपा जिलामंत्री कल्पेश अग्रवाल ने देते हुए कहा कि दरअसल पूरी योजना २४ करोड़ ५४ लाख में पूरी हुई लेकिन इसमें से १६ करोड़ ४२ लाख रुपए तो कांग्रेस शासित नपा ने पाइप खरीदी में ही खर्च कर दिए थे। कांग्रेस इस मुद्दे को इसलिए उठा रही है जिससे पूर्व नपा अध्यक्ष रवि जायसवाल सवालों में घिर जाएं क्योंकि उन्हीं के कार्यकाल में पाइप खरीदी हुई थी। इससे जायसवाल विवादित हो जाएंगे और आने वाले दिनों में नगर पालिका चुनाव में वह अपने आप ही टिकट की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। इसके लिए दो धुर विरोधी एक होकर काम कर रहे हैं।
इधर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रवि जायसवाल का कहना है कि न तो पहले उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार हुआ है न ही वर्तमान नगर पालिका ने इस मामले में भ्रष्टाचार किया है। योजना के काम में देरी हुई थी इसलिए इसकी लागत बढ़ गई है। जायसवाल ने अप्रत्यक्ष तौर पर यह कहकर कल्पेश अग्रवाल की बात का समर्थन किया है।
आधा पानी भी नहीं मिल रहा है मेहराघाट से
इटारसी. जल आवर्धन के लिए मेहराघाट का चयन क्या गलत था? अब यह सवाल उठना लाजमी है। दस साल तक लटकी रही जल आवर्धन योजना के माध्यम नपा शहर में पानी लाने का दावा कर रही थी लेकिन मेहराघाट से पर्याप्त पानी नहीं लाया जा सका।
शहर में पेयजल संकट के हालात यह है कि लगभग सभी वार्डों में टैंकरों के सहारे काम चल रहा है। सबसे ज्यादा हालात है पुरानी इटारसी में खराब हुए हैं। इधर शहर के भी सोनासांवरी नाका, न्यास कॉलोनी, सूरजगंज सहित अन्य क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी हुई है।
यह है स्थिति
मेहराघाट के जलसंयंत्र की क्षमता १५ एमएलडी है लेकिन बामुश्किल ६ एमएलडी पानी संयत्र तक पहुंच रहा है क्योंकि नदी में पानी ही नहीं है। जब नदी में यहां पानी ही नहीं रहता है तो फिर यहां क्यों जल आवर्धन योजना के जल संयत्र बनाया गया। हालात यह है कि नदी में भी पानी कम हो गया है इसके कारण संयंत्र तक पानी नहीं पहुंच रहा था ऐसे में नगर पालिका को नदी के अंदर जेसीबी से नाला खोदकर नदी का पानी लाना पड़ा लेकिन यहां फिर भी उतना पानी नहीं आ रहा है।
- क्यों नहीं आ रहा है पानी
तवा नदी पर डैम के बाद रिसकर पानी नदी में आगे आता है। मेहराघाट से पहले यह पानी रेलवे लेती है और फिर यह मेहराघाट में नपा के जल आवर्धन योजना के तहत बने जल संयंत्र के पास पहुंचता है।
- नदी पर जबलपुर इटारसी रेलवे पुल बन रहा था। इसे बनाने के लिए नदी के १० फीट का मिट्टी और रेत का बोरी बंधान किया गया था। यहां काफी पानी एकत्रित है लेकिन पुल बनने क बाद स्टॉप डैम को तोड़ा नहीं किया गया है।
- नदी के कछार में किसान डंगरवाड़ी लगाते है। इसलिए कुछ किसान भी पहले ही पानी रोक लेते हैं जिससे पर्याप्त पानी मेहराघाट तक नहीं पहुंच पाता।
- ४० एमएलडी प्रतिदिन हो रही पानी की खपत
सामान्य दिनों में प्रतिदिन 32 एमएलडी पानी की आवश्यकता है, लेकिन गर्मियों में यह बढ़कर 40 एमएलडी तक पहुंच गई है। इसमें नगर पालिका धोखेड़ा पंप से 11 एमएलडी, शहरी पंप से 15 से 17 एमएलडी पानी के अलावा कुछ टैंकर से पूर्ति की जा रही है।
आंकड़ों से समझे पानी का गणित
सामान्य दिनों में पानी की मांग - 32 एमएलडी
गर्मियों में पानी की मांग - 40 एमएलडी
मेहराघाट जल संयंत्र की क्षमता- १५ एमएलडी
मिल रहा है इतना - ६ एमएलडी
धौंखेड़ा पंप से - 11 एमएलडी
अन्य पंपों से - 15 एमएलडी
मिल रहा है कुल -३१ एमएलडी
मेहराघाट जल संयंत्र की जितनी क्षमता है उतना पानी नहीं मिल रहा है। यहां से आधे से भी कम पानी प्राप्त हो रहा है क्योंकि जहां जल संयंत्र लगा है वहां तक पानी नहीं पहुंच रहा है। पानी पहुंचाने के लिए नाली खोदी थी लेकिन मेहराघाट के पहले ही रेलवे का पंप है जिससे पानी जाता है। इसके अलावा यहां रेलवे पुल के लिए रेलवे ने अस्थाई स्टॉप डैम बनाया था जिससे पानी वहां से आगे नहीं बढ़ रहा है। इसके अलावा डंगरवाड़ी वाले भी पानी का उपयोग कर रहे हैं।
आदित्य पांडे, सब इंजीनियर नगर पालिका
Published on:
04 Jul 2019 11:20 am
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