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इटारसी। जुलाई माह से शहर के सभी स्कूल खुल गए हैं। इन स्कूलों के खुलने का सीधा असर आंगनबाड़ी केंद्रों पर हुआ है। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों की संख्या एकदम से घट गई है जिसके कारण उन केंद्रों में बच्चों के मान से आने वाला खाना फिंकने के हालात बन रहे हैं। खाना बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे वार्ड के ही जरुरतमंद लोगों को बांटा जा रहा है।
97 केंद्र, 45 मिनी केंद्र
शहर में करीब ९७ आंगनबाड़ी केंद्र और ४५ मिनी केंद्र हैं। इन केंद्रों में औसतन 30 से 40 बच्चे दर्ज रहते हैं मगर केंद्रों में उसके आधे ही बमुश्किल आते हैं। इन आंगनबाड़ी केंद्रों में दर्ज संख्या के मान से खाना सप्लाई होता है। जुलाई माह के पहले तक केंद्रों को मिलने वाला खाना बच्चों में बंट भी जाता था क्योंकि छोटे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्रों तक आते थे। अभी उक्त सभी केंद्रों में केवल 8 से 10 बच्चे ही आ रहे हैं जबकि वहां पर 25 से ज्यादा बच्चों के मान से खाद्य सामग्री आ रही है।
एकदम से घटी बच्चों की संख्या
जुलाई माह की शुरूआत होते ही शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों और मिनी केंद्रों में आने वाले बच्चों की संख्या में एकदम से गिरावट आ गई है। इसका प्रमुख कारण यह है कि स्कूल खुलने के बाद अब अभिभावकों ने उन्हें स्कूल भेजना शुरू कर दिया है। इधर आंगनबाड़ी केंद्रों को तो दर्ज संख्या के मान से ही भोजन दिया जाना है। अब बच्चों के नहीं आने और ज्यादा मात्रा में खाना आने से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उसे संभालना मुश्किल हो रहा है। कार्यकर्ताओं द्वारा भोजन को वार्ड के ही जरुरतमंद हितग्राहियों के घर पहुंचाया जा रहा है ताकि खाना फेंकने से बचा जा सके।
दिखवा लेंगे
यह बात सही है कि केंद्रों में बच्चों की संख्या घटी है और उससे खाना बच रहा है। हम दिखवा लेते हैं कि किन केंद्रों में ज्यादातर यह स्थिति बन रही है। उसमें जो भी सुधार होगा वह अवश्य किया जाएगा।
प्रमोद गौर, परियोजना अधिकारी इटारसी
Published on:
09 Jul 2018 11:13 am
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