23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जंगल बचाने इटारसी, भोपाल और मुंबई में कर चुके मैराथन, गांवों और शहर चलाया जागरूकता अभियान

गाय के गोबर से तैयार कंडे और लकड़ी की होली जलाने का 23 वर्षों से चला रहे अभियान  

2 min read
Google source verification
He has done marathons in Itarsi, Bhopal and Mumbai to save forests, and launched awareness campaigns in villages and cities.

He has done marathons in Itarsi, Bhopal and Mumbai to save forests, and launched awareness campaigns in villages and cities.

इटारसी. होली पर लकड़ी जलाने की बजाय गोबर और घास से बनी लकड़ी का उपयोग करने लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यह अभियान पिछले 23 साल से लगातार सुपरली गांव के किसान योगेंद्र ङ्क्षसह सोलंकी चला रहे हैं। योगेंद्र जागरूकता के लिए इन वर्षों में इटारसी, भोपाल और मुंबई तक में मैराथन कर चुके हैं।

होली के मौके को शहरवासियों के लिए खास बनाने व वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने के उद्देश्य से योगेंद्र हर साल गोबर और घास से बनी लकड़ी जलाने के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं। स्कूलों में जाकर बच्चों को लकड़ी का विकल्प बताते हुए गोबर और घास से होलिका दहन के लिए लकड़ी बनाने का प्रशिक्षण भी दे चुके हैं। योगेंद्र बताते हैं कि गोबर से तैयार किए गए कंडे व लकड़ी दोनों 2 से 3 घंटे में जलकर ठंडे हो जाते हैं। साथ ही इन लकड़ी व कंडों से निकली राख कई मायनों में वातावरण के लिए लाभकारी है।

बचाए जा सकेंगे हरेभरे पेड़-जागरूकता अभियान चलाने वाले योगेंद्र बताते हैं कि गोबर और घास से बनी लकड़ी से होलिका दहन करने से न केवल वायु प्रदुषण को नियंत्रित करने में लाभ होता है, बल्कि पेड़ों की कटाई को भी कम किया जा सकता है। गोबर और घास ेसे बनी लकड़ी का होलिका दहन में जितनी अधिक लोग उपयोग करेंगे, उतने ही पेड़ों को कटने से बचाया जा सकता है। योगेंद्र अभियान की सफलता के बारे में कहते हैं कि अब तो कई कंपनियां भी गोबर और घास की लकड़ी बनाने का काम कर रहीं हैं।

इटारसी, भोपाल और मुंबई में मैराथन-

योगेंद्र सिंह सोलंकी होली पर पेड़ों को बचाने के लिए कई बार मैराथन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2001 से 2006 तक लगातार इटारसी से भोपाल तक 250 किमी की मैराथन की गई। यह मैराथन इटारसी से शुरू होकर बाड़ी बरैली के रास्ते भोपाल तक पहुंचती थी। 2009 में इटारसी शहर में मैराथन की। इसके बाद 2013-14 में दो साल मुंबई में मैराथन कर लोगों को जागरूक किया। इसके बद वर्ष 2014 से लगातार पांच साल तक भोपाल के बोर्ड ऑफिस से रोशनपुरा चौराहा तक मैराथन कर चुके हैं।