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भोपाल में कुनबी समाज का अंतर्राष्ट्रीय परिचय सम्मेलन, इटारसी से 400 परिवार होंगे शामिल

- 5 मार्च को होगा समाज का होली मिलन, प्रतिभा सम्मान तथा महिलाओं का हल्दी - कुमकुम कार्यक्रम।

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भोपाल में कुनबी समाज का अंतर्राष्ट्रीय परिचय सम्मेलन, इटारसी से 400 परिवार होंगे शामिल

भोपाल में कुनबी समाज का अंतर्राष्ट्रीय परिचय सम्मेलन, इटारसी से 400 परिवार होंगे शामिल

इटारसी। अखिल भारतीय लोणारी कुनबी समाज मप्र का अतंर्राष्ट्रीय सम्मेलन भोपाल में 05 मार्च को भेल के बरखेड़ा स्थित चपाती केंद्र पर होगा। इस सम्मेलन में इटारसी से भी करीबन 300-400 कुनबी समाज के लोगों के शामिल होने की संभावना है।


समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु राने ने बताया कि 05 मार्च को सुबह 11 बजे, से 18 वाँ नि:शुल्क अतंर्राष्ट्रीय युवक युवती परिचय सम्मेलन, होली मिलन तथा महिलाओं का हल्दी - कुमकुम कार्यक्रम होगा। सम्मेलन में आने वाले समाज बंधु 26 फरवरी से पहले पंजीयन कराएं।


समाज के इटारसी इकाई के राजकुमार ने बताया कि सम्मेलन में होने 18 राज्यों एवं विदेशों में बसे युवक युवती, अभिभावक तथा समाज बंधु भाग लेंगे। वही इटारसी से करीबन 300-400 परिवार के सदस्यों के भी शामिल होने की संभावना है। भोपाल सम्मेलन में नि:शुल्क स्वास्थ्य एवं जांच शिविर में परामर्श, बोन डेन सिटी टेस्ट, शुगर टेस्ट, ईसीजी, बीपी के साथ नि:शुल्क दवाई वितरण तथा बेटी बचाओं एवं भ्रुण हत्या पर नुक्कड़ नाटक होगा। इस अवसर बायोडाटा की पुस्तिका का भी प्रकाशन होगा। संगठन के 21 वर्ष पूर्ण होने पर पदाधिकारी एवं सभी सदस्यों का सम्मान किया जाएगा।

कुनबी समाज का इतिहास
कुनबी समाज का इतिहास अत्यंत ही समृद्ध और गौरवशाली रहा है. यह समुदाय अपने वीरता और पराक्रम के लिए जाना जाता है. चौदहवीं शताब्दी में और बाद में, कई कुणबी विभिन्न शासकों की सेनाओं में सैनिक के रूप में कार्यरत थे. शिवाजी के अधीन मराठा साम्राज्य की सेनाओं में सेवारत अधिकांश मावला इसी समुदाय से थे. कहा जाता है कि छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी सैन्य शक्ति मुख्य रूप से मावल क्षेत्र के कुनबी मावले से प्राप्त होती थी. बता दें कि मावला मावल क्षेत्र के निवासियों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है. मराठा साम्राज्य के शिंदे और गायकवाड़ राजवंश मूल रूप से कुनबी मूल के हैं. वर्तमान में, एक जमींदार जाति होने के कारण कुनबी समाज महाराष्ट्र में काफी प्रभावशाली हैं. महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में कुणबी‌, तेली और माली के साथ 50 % मतदाताओं की रचना करते हैं और राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यहां यह चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए जाने जाते हैं. उत्तर भारत की कृषक जाती कुर्मी और कुनबी में काफी समानताा है.