
खुदाई में मिली दुर्लभ भगवान बुद्ध की ध्यानस्थ प्रतिमा
इटारसी। इटारसी और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में पुरातत्वीय अवशेषों की भरमार हैं। इनमें से एक रेसलपुर है, जहां अधिकतर प्राचीन प्रतिमाएं है, जो कलात्मक दृष्टि से बहुत ही प्राचीन हैं। यहां प्राचीन बुद्ध प्रतिमा मिली है, जोकि कृषक के बाड़े में एक सीमेंट के छोटे से चबूतरे पर रखी हुई है।
कृषक श्यामसुंदर चौधरी के भाई राजेंद्र चौधरी के घर के पीछे एक दुर्लभ प्रतिमा वर्षों से बाड़े में गड़ी हुई थी। श्यामसुंदर ने बताया कि इस मूर्ति का ऊपरी हिस्सा ही दिखाई देता था। हमारे पूर्वज देवराज बाबा के नाम से कई सदियों तक इसकी पूजा करते रहे। करीब 20 साल पहले जब आसपास की मिट्टी का क्षरण हुआ, तो मूर्ति का सिर दिखाई दिया। जब खुदाई की, तो बुद्ध की चार- पांच फीट ऊंची प्रतिमा दो टुकड़े में निकली। इसे हमने चबूतरा बनाकर स्थापित कर दिया है।
बलुआ पत्थर से बनी करीब 4 फुट ऊंची और 3 फुट से ज्यादा चौड़ी यह प्रतिमा करीब डेढ़ फुट मोटे शिलाखंड पर उकेरी गई है। मूर्ति में भगवान बुद्ध ध्यानस्थ मुद्रा में है। प्रतिमा के ऊपर त्रिछत्र बना हुआ है। प्रतिमा बीच में से टूटी हुई है, जिसे जोड़ रखा है। पुरातत्व विभाग और जिला प्रशासन को इन प्रतिमाओं को संरक्षित करने के लिए पहल करनी चाहिए।
ये मूर्तियां भी मिली है यहां
0. रेसलपुर गांव के आसापास कई स्थानों पर प्राचीन मूर्तियां सती शिलाएँ, स्थापत्य खंड, स्तंभ आदि बिखरे पड़े हुए हैं।
0. यहां उमा महेश्वर की प्रतिमा का ऊपरी भाग मिला है, जिसमें पार्वती हाथों में दर्पण है। मंदिर प्रांगण में पेड़ के नीचे कई मूर्तियाँ रखी है।
0. शिव की एक अस्पष्ट और खंडित प्रतिमा है जिसमें वे सर्प पकड़े हुए हैं वही अंबिका की प्रतिमा है।
0. लगभग 17 वीं शताब्दी की गणेश प्रतिमा मंदिर परिसर में दीवार में जड़ी हुई है। सूंड दाहिनी ओर मुड़ी हुई है। गणेश के सिर और कान शरीर की तुलना में काफी बड़े हैं। शैली के कारण यह प्रतिमा अन्य प्रतिमाओं से अलग है।
0. गांव में कई पत्थर के बने स्तंभ यहां-वहां बिखरे हुए हैं, उनमें कई बहुत अच्छी स्थिति में है, जिन पर सुंदर नक्काशी और प्रतिमाएं अंकित हैं।
0. कई स्तंभ जमीन में धँसे हुए हैं और उनके बारे में गांव वालों की अपनी अपनी धारणाएं हैं। कुछ सती स्तंभ है, जो बहुत अच्छी स्थिति में है।
बॉक्स - रेसलपुर, पानपुरा के पास पुरानी प्रतिमाएं : डॉ. व्यास
नर्मदापुरा की पुरातत्व विशेषज्ञा डॉ. हंसा व्यास ने बताया कि इस क्षेत्र में उमा महेश्वर, गणेश जी, शिवजी की खंडित प्रतिमाएं है, जोकि 12 वीं शताब्दी की हैं। बुद्ध की प्रतिमा का मिलना बहुत ही दुर्लभ और आश्चर्यजनक है। रेसलपुर, पानपुरा में ऐतिहासिक स्तूप, विहार मिले हैं। ऐसा माना जा सकता है कि यहां कोई भव्य मंदिर रहा होगा, जो किसी कारण से नष्ट हो गया या कर दिया गया हो और उसके अवशेष आज भी यहां बिखरे हैं।
Published on:
14 Apr 2022 03:11 pm
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