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इटारसी। बरसात का यह मौसम डिप्टीथीरिया यानी गलघोंटू बीमारी के लिए अनुकूल है बावजूद उसके स्वास्थ्य विभाग इसको लेकर गंभीर नहीं है। इक्का-दुक्का केस निकलने की अब तक हुई घटनाओं के कारण स्वास्थ्य विभाग इस बीमारी को लेकर पूरी तरह बेफिक्र है। स्वास्थ्य विभाग की यह बेफिक्री अचानक डिप्टीथीरिया का केस सामने आने के बाद बच्चों की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
क्या होता है डिप्टीथीरिया
डिप्टीथीरिया बीमारी को आम बोलचाल की भाषा में गलघोंटू बीमारी कहा जाता है। इस बीमारी के टारगेट पर आमतौर पर 10 साल तक के बच्चे होते हैं। यह बीमारी कोराइन बैक्टीरियम डिप्टीथीरिया नामक जीवाणु से होती है। जीवाणु से शरीर में जहर फैलने की संभावना रहती है जिसमें मौत तक हो सकती है।
यह हैं डिप्टीथीरिया के लक्षण
डिप्टीथीरिया बीमारी के सबसे प्रमुख लक्षण शुरूआत में सर्दी, खांसी और बुखार के रूप में नजर आते हैं। इस बीमारी में यदि बच्चों को सही समय पर उपचार नहीं मिलता है तो सांस की नली के पास सफेद झिल्ली बनने लगती है। यह झिल्ली बढ़ते हुए श्वास नली को दबा देती है जिससे बच्चे को श्वास लेने में तकलीफ होने लगती है और उसका दम घुटने लगता है और इसमें कई बार जान भी जा सकती है।
2014 में 3, 2016 में 1 मामले से हड़कंप
डिप्टीथीरिया बीमारी ने जिले में दो बार अपना असर दिखाया है। 4 साल पहले मोहसा गांव में 3 बच्चे इसकी चपेट में आए थे। उसके बाद पिछले साल 2 साल पहले वर्ष 2016 में कोठी बाजार होशंगाबाद में इस बीमारी से पीडि़त एक बच्चा मिला था। इस बीमारी के केस सामने आने के बावजूद स्वास्थ्य महकमा इस मौसम में डिप्टीथीरिया बीमारी को लेकर सजग नहीं है। शहर के सरकारी अस्पताल में इस बीमारी से पीडि़त यदि कोई बच्चा आ जाए तो यहां पर उसके उपचार के लिए कोई भी दवा उपलब्ध नहीं है।
मुंबई से आती है दवा
डिप्टीथीरिया बीमारी की दवा अन्य बीमारियों की दवाओं की तरह शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध नहीं रहती है। इसकी दवा काफी महंगी आती है और उसे मुंबई से डिमांड पर बुलवाया जाता है। इस दवा को ज्यादा दिन तक बिना उपयोग किए रखने से वह खराब भी हो जाती है। महंगी दवा होने से सरकारी अस्पतालों में इसका स्टॉक नहीं रखा जाता है।
किसने क्या कहा
अस्पताल में इस बीमारी की दवा उपलब्ध नहीं है। इस बीमारी की दवा महंगी आती है और उसे सहेजना मुश्किल होता है। आवश्यकता पडऩे पर ही उसकी डिमांड भेजी जाती है।
डॉ एके शिवानी, अधीक्षक डीएसपीएम अस्पताल
Published on:
02 Aug 2018 09:58 am
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