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खुद को बताता था सिंधी समाज का रक्षक, सिंधी पंचायत ने किया बहिष्कार

-सिंधी पंचायत ने सामाजिक गतिविधियों से व्यवसायी महेश मिहानी का किया बहिष्कार-पत्रकार वार्ता में सिंधी पंचायत पदाधिकारियों ने दी जानकारी

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itarsi, sindhi panchayat, meeting, praposal, rusticate, mahesh mihani

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इटारसी। सिंधी पंचायत के द्वारा समाज का रक्षक जैसा कोईभी पद सृजित नहीं किया गया है। व्यवसायी महेश मिहानी अपने मन से ही खुद को समाज रक्षक बताकर प्रचार कर रहे हैं और कोई उनका विरोध करता है तो वे अभद्रता करते हैं और छापे डलवाने की धमकी देते हैं। उनको समझाने के बाद भी वे खुद को सुधार नहीं रहे हैं इसीलिए पंचायत की सहमति से उनका सामाजिक कार्यक्रमों से बहिष्कार किया गया है।
यह जानकारी पंचायत के अध्यक्ष अशोक लालवानी ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी कई बार पंचायत के पदाधिकारियों से विवाद कर चुके हैं। उन्हें सामाजिक गतिविधियों से बाहर करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। वे कोई समाज के रक्षक नहीं हैं और ना ही ऐसा कोई पद है। वार्ता ने पंचायत के अन्य पदाधिकारियों ने महेश मिहानी पर पुलिस अफसरों और सेल्स टैक्स और इनकम टैक्स के छापे पड़वाने की धमकी देने का भी आरोप लगाया। इस मौके पर उपाध्यक्ष कैलाश नवलानी सहित अन्य सदस्य मौजूद थे।
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ऐसे हुआ निर्णय
सिंधी पंचायत द्वारा रविवार को चैतीचांद पर्व और होली मिलन समारोह के संदर्भ में बैठक का आयोजन सिंधी धर्मशाला में किया गया था। इस बैठक में व्यवसायी महेश मिहानी के सोशल मीडिया सहित अन्य मंचों पर खुद को सिंधी समाज का रक्षक बताने का मामला भी उठा। जिस वक्त यह मामला उठा उस वक्त व्यवसायी महेश मिहानी भी वहीं मौजूद थे इस बात को लेकर मिहानी का पंचायत पदाधिकारियों से विवाद हो गया। इस विवाद के बाद पंचायत पदाधिकारियों व सदस्यों की सहमति से उन्हें समाज के सामाजिक गतिविधियों से बहिष्कृत करने का प्रस्ताव पास किया गया।
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इनका कहना है
हम पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं वे सब झूठ हैं। हम जब बैठक में गए थे तो वहां फर्जी उपाध्यक्ष कैलाश नवलानी को मंच पर बैठाने का विरोध किया इसी पर बहस हुई थी। पंचायत अध्यक्ष अशोक लालवानी और कैलाश नवलानी के गलत कामों का विरोध करने के चलते ही पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर यह कदम उठाया गया है।
महेश मिहानी, व्यवसायी