
There is no treatment here, no medicine available itarsi, tangna, jamani, gurra
इटारसी. आदिवासी ब्लॉक केसला में स्वास्थ्य सुविधाएं ध्वस्त है। यहां दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन दोनों केंद्रों पर चिकित्सकों नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह है कि यहां आने वाले मरीजों को उपचार नहीं मिल पा रहा है जिससे मरीजों को शहरों में उपचार कराने आना पड़ रहा है।
ग्रामवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। यहां चिकित्सक है नहीं हैं जाओ तो उपचार मिलता नहीं है। यहां हालात यह है कि सर्दी खांसी के लिए भी दवाईयां देने वाला तक नहीं है। जो चिकित्सक पदस्थ है वह कभी आते कभी नहीं आते हैं। टांगना में तो चिकित्सक आ ही नहीं रहे हैं। खास दिक्कत यह है कि आम दिनों में तो लोग किसी तरह शहर पहुंचकर उपचार करा लेते हैं लेकिन बारिश के दिनों में परेशानी बढ़ जाती है।
कहां कैसे हालात
जमानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक चिकित्सक आरके मेहतो हैं जो तीन दिन देहरी में अपनी सेवाएं देते और तीन दिन जमानी में मरीजों को देखते हैं। यहां एक लैब टेक्निशियन और नर्स हैं जो मरीजों को उपचार देते हैं। यदि कोई गंभीर बीमार व्यक्ति आ जाता है तो वह मरीज को शहर ले जाने का कह देते हैं ऐसे में यहां मौजूद स्टॉफ को लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है।
टांगना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक आयुष चिकित्सक विनीता बाथरी हैं उन्हीं के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र चल रहा है। यहां एक चिकित्सक पदस्थ है डॉ. कांता नैनानी उनका पिछले दिनों एक्सीडेंट हो गया था इसके बाद से उन्होंने अभी ज्वाइन नहीं किया है जिससे यहां मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यहां एक चिकित्सक शुभा दीक्षित भी पदस्थ थीं जिन्हें होशंगाबाद जिला अस्पताल में अटैच कर दिया गया है।
दवाई देने वाला भी नहीं
जमानी और टांगना दोनों स्वास्थ्य केंद्र के बीच में एक ही फार्मासिस्ट पदस्थ थे। जो दोनों केंद्रों पर आने वाले मरीजों को दवाईयां देते थे लेकिन फार्मासिस्ट को भी होशंगाबाद जिला अस्पताल में अटैच कर दिया है। अब हालात यह हैं कि मरीजों को दवा तक नहीं मिल पाती है।
गुर्रा में अच्छे नहीं हैं हाल
इधर होशंगाबाद विकासखंड के गुर्रा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी समस्या है। यहां एक आयुष चिकित्सक और नर्स के भरोसे काम चल रहा है। यहां एक चिकित्सक डॉ. रुचि जोशी पदस्थ हैं लेकिन वह मेटरनिटी लीव पर हैं ऐसे में यहां भी मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता है और उन्हें शहर ही आना पड़ता है।
चिकित्सकों की पदस्थापना शासन के स्तर का मामला है लेकिन जहां जैसी जरूरत होती है उस हिसाब से उपलब्ध होने पर चिकित्सक भेजे जाते हैं।
प्रमोद चतुर्वेदी, सीएमएचओ होशंगाबाद
Published on:
26 Jun 2018 07:00 am
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