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लापता खनिज कारोबारी की पत्नी ने लिखा 12 पन्नों का सुसाइट अटेम्ट लेटर….आप भी पढ़ें

मायके जाने कहकर बच्चों के साथ घर से निकली थी संगीता, ससुर ने कहा मुझे बदनाम करने की जा रही साजिश 

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Lali Kosta

Dec 25, 2016

Suicide Attempts letter, 12 pages written, written

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कटनी। शहर के सिविल लाइंस स्थित खनिज कारोबारी रंजन ग्रोवर की पत्नी संगीता ग्रोवर की तलाश में दो जिले कटनी व जबलपुर की पुलिस लगी है। रहस्यमय तरीके गायब हुई संगीता ग्रोवर के ससुर व खनिज कारोबारी मदन ग्रोवर ने बताया कि बहू संगीता बेटी से भी बढ़कर थी। घर का सारा निर्णय वहीं लेती थी। स्कूल में क्रिसमस की छुट्यिां लग गई है। बीते बुधवार को वह 5 दिन के लिए बच्चों के साथ मायके जाने के लिए घर से निकली थी। संगीता को ससुराल आए करीब 14 साल हो गए है। हमने कभी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं होने दी। वह कहां आ जा रही हैं। कभी कुछ पूछा भी नहीं। फिर उसने ऐसा कदम क्यों उठाया। कुछ पता नहीं चल पा रहा है। सुसाइट अटेम्ट जो संगीता ने लिखा है। वह मुझे पढऩे को मिला है। लोगों द्वारा मुझे बदनाम करने का षडय़ंत्र रचा गया है।

रसिया से इंटरनेशनल शतरंज स्पर्धा खेलकर लौटा बड़ा पोता
संगीता से ससुर मदन ग्रोवर ने बताया कि बड़ा पोता रूद्रांक्ष बीते नवंबर माह में इंटरनेशनल
शतंरज खेलने रसिया गया था। वहां से लौटकर आने के बाद सीएम हाउस में उसका सम्मान होने की चर्चा थी। हाल ही में नागपुर में हो रही शतरंज स्पर्धा में खेलने जाने वाला था। उसकी फीस भी जमा हो चुकी है। इसमें छोटा पोता भी शामिल हो रहा था। घर के सारे सदस्य दोनों बेटों को नागपुर भेजने की तैयारी में जुटे हुए थे।

छह लोग ही घर में करते है निवास
घर मेंं पिछले 16 साल से काम कर रहे नौकर व अन्य ने बताया कि मालकिन संगीता बहुत संास्कारिक महिला थी। उनके घर में सास-ससुर, संगीता-रंजन ग्रोवर और दोनों पोतो के अलावा और कोई नहीं रहता है। पूरा परिवार काफी खुशहाल था। पर पता नहीं मालकिन ने ऐसा कदम क्यों उठा लिया। दूसरी तरफ संगीता के इस तरह के घर से अचानक बच्चों को लेकर गायब हो जाने के कारण पड़ोसी भी अचंभित है कि संगीता ने ऐसा कदम क्यों उठाया है।

सीएसपी को सौंपी जांच
संगीता ग्रोवर के मिले सुसाइट अटेम्ट पत्र और रहस्यमय ढंग से गायब होने के मामले की जांच की जा रही है। पूरे मामले की जांच सीएसपी कर रहे हैं।
गौरव तिवारी, पुलिस अधीक्षक

संगीता ने क्या लिखा है सोसाइड अटेम्ट में:
संगीता ग्रोवर द्वारा लिखे गए 12 पन्नों के सुसाइट अटेम्ट पत्र पुलिस को मिले है। दूसरी ओर पत्नी के अचानक गायब होने की सूचना मिलने के बाद शुक्रवार सुबह पति और परिजन तलाश में जुट गए है। मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण 12 पन्नों के मिले इस सुसाइट अटेम्ट पत्र में खनिज कारोबारी की पत्नी के क्या लिखा है, उसके कुछ अंश आप भी पढि़ए...

मेरे ससुर मदनलाल ग्रोवर बहुत अच्छे इंसान है, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के चलते मैं अंदर से माइंडली बहुत टार्चर हो रही थी। मेरे दो बेटे है। जो मेरे ही कारण इस दुनिया में है। क्योंकि मैं नहीं चाहती की जिन परिस्थितियों में मैं जी रही हूं। उसे मेरे बच्चे फेस करे। ये मैंने सिर्फ मेरी जैसी उन औरतों के लिए किया है जो परिस्थितियों से समझौता करती है। कभी समाज के नाम पर। कभी मान मर्यादा और बच्चों के नाम। जो अपने ही घर में टार्चर होती है। न हमारे पास कहने के लिए मायका है और न ही ससुराल। बेटी बनाकर जिस बहू को घर लाए थे। उसके भी कुछ अरमान थे। आपके जिस बेटे के लिए मैं आई। उसे ही सबकुछ माना।
उस पर अटूट विश्वास किया, लेकिन मेरे सपने कुछ ही दिन में टूटने लगे। क्योंकि वे सपने थे। और सच बहुत कड़वा होता है। मैं सबकुछ देखकर भी खुद को झूठा साबित करती रही। मुझे लगा की आप लोगों को पता चलेगा तो दुख लगेगा। मैं धीरे-धीरे सब ठीक कर लूंगी। शायद मुझमें ही कुछ कमी होगी। यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। आपने बेटे की शादी कर दी। पर उसे सम्मान करना नहीं सिखाया। जब आपका बेटा आपकी ही इज्जत नहीं करता, जिसके कारण वेा दुनिया में है। उसे क्या पता एक औरत क्या होती है। उसके लिए शादी तो एक बिजनेस है। उसके लिए मैं पत्नी नहीं एक फर्नीचर हूं। जिसे जब चाहे इस्तेमाल करो। उसे इस बात का कोई फर्क भी नहीं पड़ता है।

आपका बेटा तो दुकानदार की तरह आर्डर देता है। उसे अहसास नहीं की पत्नी का रिश्ता क्या होता है। बच्चे पैदा करना पता है लेकिन उस बच्चे के पिता की क्या जिम्मेदारी है, उससे कोई मतलब नही। डॉक्टर के यहां चलने में भी उसे शर्म आती है। मैंनें आपके बेटे को बहुत सुधारने की कोशिश की। मैं तब मुहं खोला जब आपका बेटा कॉलगर्ल के झांसे में आया। वह भी इस उम्मीद से की पापा आप मेरी मदद करोगे। पापा अब मैं इस झूठी जिदंगी से थक चुकी हूं। पापा आप से ये सब मैं बोलना नहीं चाह रही थी। पर मजबूर और बेशर्म होकर बोलना पड़ रहा है। पापा सच यह है कि सास-ससुर कभी माता-पिता नहीं बन सकते। और बहूं कभी बेटी। समझ में नहीं आता पापा आप लोगों पर तरस खाऊ। या नफरत करूं।

कान्हा किसली मेंं बेहूदगी दिखाई। शराब पीने और लड़कों के साथ नाचने को कहा। मैं अपने बच्चों के लिए जी रही थी। आपका बेटा जब मेरे पास आता है तो दम घुटता है। सुसाइट अटेम्ट पत्र में संगीता ने लिखा है कि भगवान करें मेरी लाश भी आपको न मिले। मुझे जानवर खा ले यह मुझे मंजूर है, लेकिन मेरा कोई भी संस्कार आपके बेटे के हाथ से हो। यह मुझे मंजूर नहीं। आप बेटे को सुधारने में मेरा साथ देते तो शायद मैं कुछ कर पाती। बस पापा हमारा साथ यहीं तक था। आपकी बेटी.....

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