22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

962 बीपीएल परिवारों में 1591 बाल श्रमिक

महाकोशल कॉलेज के प्रोफेसर व रिसर्च स्कॉलर की 20 सदस्यीय टीम के सर्वे में 1591 बाल श्रमिकों का पता चला है, सर्वे के अनुसार ये बच्चे  जिले के 25 स्लम एरिया में 962 बीपीएल परिवारों के हैं

2 min read
Google source verification

image

reetesh pyasi

Oct 27, 2016

Child labor

Child labor

जबलपुर। चाय की दुकान, होटल से लेकर बाइक सर्विस सेंटर में बड़ी संख्या में बाल श्रमिक काम कर रहे हैं। लेकिन, श्रम विभाग को चार साल में एक भी बाल श्रमिक नजर नहीं आया। विभागीय पत्राचार इस बात का खुलासा कर रहा है। इसके विपरीत हाल ही में महाकोशल कॉलेज के प्रोफेसर व रिसर्च स्कॉलर की 20 सदस्यीय टीम के सर्वे में 1591 बाल श्रमिकों का पता चला है। सर्वे के अनुसार ये बच्चे जिले के 25 स्लम एरिया में 962 बीपीएल परिवारों के हैं।
बाल श्रम करते पाए गए ये 6 से 14 साल तक के बच्चे कढ़ाई, हैंडवर्क, वैल्डिंग, ऑटोमोबाइल सर्विस सेंटर, ईंट-गारा, चाय की दुकान, होटलों व बीड़ी कारखानों में कार्यरत हैं। राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के तहत हुए सर्वे की रिपोर्ट सामने आने के बाद से ही प्रशासनिक महकमे में हड़कम्प है।

विशेष प्रशिक्षण केन्द्र खोलने की कवायद
जिले में बड़ी संख्या में बाल श्रमिक सामने आने के बाद अब श्रम विभाग डैमेज कं ट्रोल में जुट गया है। जिम्मेदार दलील दे रहे हैं कि बाल श्रमिकों को वापस समाज की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए एनजीओ की मदद से विशेष प्रशिक्षण केन्द्र खोले जाएंगे। जानकारी दी गई कि 50 बच्चों पर एक प्रशिक्षण केन्द्र खोला जाएगा। नौ साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को इन केन्द्रों में ढाई साल तक ब्रिज कोर्स कराया जाएगा। जबकि, आठ साल तक के बच्चों को सर्वशिक्षा अभियान से जोड़ा जाएगा।

सख्त कार्रवाई के प्रावधान
बाल श्रम कानून को पहले के मुकाबले और सख्त बना दिया गया है। बालक श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) संशोधन विधेयक 2016 के अनुसार 14 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी प्रकार का काम कराया गया, तो नियोक्ता पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। दो साल की सजा भी हो सकती है। इसी प्रकार 14 से 17 साल तक के किशोरों से खतरनाक क्षेत्रों में काम लेने पर भी रोक का प्रावधान किया गया है।

सर्वे रिपोर्ट हाल ही में सामने आई है। इसकी जांच व प्रमाणन
के बाद ही कुछ कह पाना सम्भव होगा। यह सर्वे राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत किया गया है।
भगवत प्रसाद, सहायक श्रम आयुक्त

ये भी पढ़ें

image