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2017 Me Karwa Chauth Kab Hai- जरूर जानें करवा चौथ के ये नियम, नहीं आएगी पूजन में कोई बाधा

दिनोदिन करवा चौथ का क्रेज बढ़ता चला जा रहा है, करवा चौथ व्रत रखने के नियम बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री...

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Karwa Chauth Kab Hai

Karwa Chauth Kab Hai

जबलपुर। साल 2017 का करवा चौथ व्रत रविवार 8 अक्टूबर को मनाया जाएगा। करवा चौथ का त्यौहार कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन ऐसी मान्यता है कि व्रत रखने से सुहागनों का सुहाग अटल होता है और दीर्घायु स्वस्थ होता है। इसके अलावा अविवाहित स्त्रियों के लिए करवा चौथ व्रत रखने की भी परंपरा है। जिससे उन्हें सुयोग्य जीवन साथी मिल सके। यह पर पूरे उत्तर भारत में जोर शोर से मनाया जाता है। जबलपुर समेत मध्य भारत की बात करें तो यहां भी इसका क्रेज कम नहीं है। दिनोदिन करवा चौथ का क्रेज बढ़ता चला जा रहा है। करवा चौथ व्रत रखने के नियम बता रहे हैं ज्योतिषाचार्य सत्येंद्र स्वरूप शास्त्री...


पहला नियम- यह व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होता है और चांद निकलने और पूजन के पश्चात संपन्न होता है। इसके पूर्व व्रतधारी महिलाएं ना तो अन्य ग्रहण करती है ना ही जल।

दूसरा नियम- शाम के समय चंद्र उदय होने से 1 घंटे पहले करीब शिव भगवान के समस्त परिवार जिनमें महादेव सहित माता पार्वती नंदी भगवान कार्तिकेय जी गणेश जी की पूजन होती की जाती है।

तीसरा नियम- पूजन के समय देव प्रतिमा का मुख पश्चिम की तरफ होना अनिवार्य है तथा स्त्री जो व्रतधारी है। उसका मुख पूर्व की तरफ होना चाहिए। यही पूजा का सबसे बड़ा नियम है।

इस बार करवा चौथ का पूजन 8:00 बजे से शुरू होगा जो कि 9:10 तक रहेगा। पूजा की अवधि 1 घंटे 10 मिनट तक रहेगी। वही चंद्रोदय का समय सवा 8:00 बजे है। बहुत से लोगों में यह जिज्ञासा है कि इसकी विधि कैसी होनी चाहिए और यह कब होना चाहिए।

पूजन विधि हम बताते हैं आपको - इसकी पूजा विधि व्रतधारियों को सुबह सूर्योदय से पहले स्नान आदि कर के पूजा कर पूजा घर की सफाई कर लेनी चाहिए। फिर सास द्वारा दिया गया भोजन करें और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें। यह संध्या में सूरज अस्त होने के बाद चंद्रमा दर्शन करने के बाद ही करना चाहिए। बीच में जल आदी नहीं पीते हैं। संध्या के समय एक मिट्टी की वेदी पर देवी देवताओं की स्थापना करें। इसमें 10 से 13 करवा करवाचौथ के लिए खास मिट्टी के कलश जो बाजार से खरीद कर लाया जाते उन्हें रखना चाहिए। पूजन सामग्री में धूप दीप चंदन रोली सिंदूर आधी थाली में रखकर दीपक पर्याप्त मात्रा में घी से भरना चाहिए। यह समय पूरे समय तक चलता रहे। पूजन समाप्त होने के पश्चात भी।

चंद्रमा निकलने से लगभग एक घंटा पहले पूजन शुरू करें और अच्छा हो कि सभी महिलाएं परिवार के जो भी व्रतधारी हैं एक साथ बैठकर करें। इस दौरान करवा चौथ की व्रत कथा भी सुनें और उसमें बताए गए आदर्शों और वचनों को पालन करने का संकल्प करें। चंद्र दर्शन के द्वारा छलनी से दर्शन करें और उसको चंद्र को अर्घ देकर पति की दीर्घायु की कामना करें।

मुख्यतया पंजाब का या उत्तर भारत का त्यौहार है वहां चौथ का त्यौहार सरगी के साथ आरंभ होता है। यह करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले किया जाने वाला भोजन होता है। जो महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उन्हें मना कर देती है। शाम को सदा सुहागन की तरह सोलह श्रंगार कर महिलाएं पूजन करती हैं और घेरा बनाकर बैठती हैं। साथ में पूजन कथा सुनती हैं। भारत के अन्य देशों की बात की जाए तो मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश राजस्थान में गौ माता की पूजा की जाती है। गौर माता की पूजा के लिए प्रतिमा गाय के गोबर से बनाई जाती है।