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- अलग-अलग उम्मीदवारों की ओर से दायर 30 याचिकाओं पर कोर्ट ने दिया यह फैसला
जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने उन पटवारी-राजस्व निरीक्षकों को राहत दी है, जो पचास साल की आयु पूरी कर चुके हैं। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने इन्हें जस्टिस नायब तहसीलदार के पद पर होने वाली नियुक्तियों के लिए आयोजित की जाने वाली परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए। जबकि कोर्ट ने उन उम्मीदवारों को राहत देने से इनकार कर दिया, जिन्होंने पांच साल की सेवा पूरी नहीं की है। अलग-अलग उम्मीदवारों की ओर से दायर 30 याचिकाओं पर कोर्ट ने यह फैसला दिया।
यह है मामला
टीटी नगर भोपाल के आरआई रामजी तिवारी सहित अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में दो अलग-अलग मुद्दे उठाए गए थे। याचिकाओं में कहा गया कि पटवारी व राजस्व निरीक्षक पदों से नायब तहसीलदार पद पर प्रमोशन के लिए लंबे अरसे से विभागीय परीक्षा नहीं कराई गई। 2018 में इसकी प्रक्रिया आरंभ की गई। इसके लिए विभागीय सीमित परीक्षा आयोजित की जाती है। लेकिन सरकार ने इस परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा पचास वर्ष व कम से कम पांच वर्ष का कार्यानुभव आवश्यक कर दिया। इन्हीं दोनों बिंदुओं को याचिकाओं में चुनौती दी गई। कहा गया कि परीक्षा आयोजित न किए जाने की वजह से कई राजस्व अधिकारी अनुभव होने के बावजूद प्रमोशन से वंचित रह गए। उनकी आयु भी इसी चक्क र में पचास वर्ष से अधिक हो गई। यह भी तर्क दिया गया कि राजस्व अधिकारियों के अनुभव में उनके प्रशिक्षण का एक वर्ष भी जोड़ा जाए। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रशिक्षण की आयु को सेवा अनुभव में जोडऩे की बात को अनुचित बताते हुए न्यूनतम अनुभव को चुनौती के बिंदु का निराकरण कर दिया। वहीं कोर्ट ने पचास वर्ष आयु पूरी कर चुके अधिकारियों को उक्त परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए।
Published on:
28 Jun 2018 06:06 am

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