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nss की यह यूनिट है लाजवाब, विदेशों में भी खूब लहरा रही है परचम

शहर में वर्तमान में ९००० है वॉलेन्टियर्स की संख्या , प्रदेश में हमारी एनएसएस, संस्कारधानी की शान

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9000 nss volunteers currently in the jabalpur

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जबलपुर। एनएसएस- राष्ट्रीय सेवा योजना की ऐसी उपलब्धियां और कहीं नहीं होंगी। शहर के कॉलेजों में अब एनएसएस की यूनिट से जुडऩा स्टूडेंट्स को पसंद आ रहा है, क्योंकि उन्होंने अब पढ़ाई के साथ-साथ सोशल वर्क के पहलुओं को बेहतर ढंग से समझने का इरादा कर लिया है। यही कारण है कि पिछले साल में ही ८ हजार स्वयंसेवकों की संख्या में बढक़र अब ९ हजार से भी अधिक पहुंच चुकी है। प्रदेशभर में हमारी संस्कारधानी की एनएसएस यूनिटों का परचम लहरा रहा है। इतना ही नहीं शहर के स्वयंसेवकों की उपलब्धियों का कारवां भी लगातार बढ़ रहा है, जहां उन्हें विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिल रहा है, वहीं वहां के कल्चर को सीखने को समझने के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं। समाज के लोगों के साथ और सामाजिक हितों से जुडक़र काम करना ही राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य है। जिस बात पर शहर की राष्ट्रीय सेवा योजना की समस्त यूनिटों द्वारा पूरी तरह से फोकस किया जा रहा है।

स्टूडेंट्स में बढ़ा रुझान
एनएसएस के जिला संगठक डॉ. आनंद सिंह राणा ने बताया कि पिछले कुछ सालों में एनएसएस में स्टूडेंट्स की संख्या काफी बढ़ चुकी है। इसका बड़ा कारण उनका सोशल सर्विस की तरफ होने वाला रुझान है, वहीं अन्य स्टूडेंट्स की उपलब्धि देखकर उनमें भी उत्साह देखने को मिल रहा है।
मिला इंदिरा गांधी नेशनल अवॉर्ड
स्वयंसेवक अजय नारायण पटेल का नाम हाल ही में इंदिरा गांधी नेशनल अवॉर्ड के लिए चुना गया है। उन्हें यह पुरस्कार राष्ट्रपति द्वारा २५ सितम्बर को प्रदान किया जाएगा। यह पुरस्कार यूनिट में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मिला है।
फिलिस्तीन में दिखाया इंडियन कल्चर
अम्बिका द्विवेदी फिलिस्तीन में भारत की संस्कृति का प्रचार-प्रसार करके लौटी हैं। अम्बिका ने बताया कि दूसरे देशों के बीच जाकर भारत और अपने शहर की संस्कृति का बखान करना काफी सुकून देता है।
साउथ कोरिया की विजिट की
निधि उपाध्याय यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के अंतर्गत साउथ कोरिया गई हैं। उनका कहना है कि एनएसएस स्टूडेंट्स को एेसा मौका दे रहा है, जहां उपलब्धि के साथ दूसरों की संस्कृति को समझने का मौका मिलता है।
श्रीलंका में किया देश की प्रतिनिधित्व
प्रफुल्ल दुबे भी एनएसएस की ओर से श्रीलंका की विजिट कर चुके हैं। कुछ ही महीनों पहले प्रफुल्ल का नाम श्रीलंका जाने के सलेक्ट हुआ है। वे कहते हैं डेडिकेशन और पोटेन्शियल से टार्गेट मिलता है।


ये हैं उपलब्धियां
- कैशलेस ट्रांजक्शन में प्रदेश स्तर पर मिली सराहना ।
- मां तुझे सलाम कार्यक्रम के अंतर्गत २५ स्वयंसेवकों ने की बॉर्डर की सैर।
- रेवा वाटिका में लगाए १५ हजार तक पौधे।
- स्वच्छता अभियान में जिला स्तरीय योगदान।
- स्वीप प्रोग्राम, ब्लड डोनेशन और अन्य जागरूकता कैम्प।

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