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आदि शंकराचार्य ने देश को एकता के सूत्र में बांधकर की 4 पीठों की स्थापना

आदि शंकराचार्य प्राकट्योत्सव पर आयोजन

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aadi sankrachary

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जबलपुर। संस्कारधानी में गुरुवार को आदि शंकराचार्य का प्राकट्योत्सव आस्था पूर्वक मनाया गया। शंकराचार्य मठ सिविक सेंटर स्थित बगलामुखी मंदिर व आदि शंकराचार्य चौक ( छोटी लाइन फाटक) स्थित समन्वय सेवा केंद्र में पादुका पूजन किया गया। इस मौके पर संतों ने सनातन धर्म संस्कृति के उत्थान में आदि शंकराचार्य के उल्लेखनीय योगदान को याद करने के साथ उनके बताए हुए मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
समन्वय सेवा केंद्र में स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि ने कहा, आदि शंकराचार्य ने देश को एकता के सूत्र में पिरोकर चार पीठों की स्थापना की। वे एक महान समन्वय वादी संत थे जिन्होंने हिन्दू धर्म के दार्शनिक आधार को सुदृढ़ किया। साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी ने कहा, आदि शंकराचार्य वेदांत के प्रणेता थे, उनके विचार, उपदेश आत्मा और परमात्मा की एकरूपता पर आधारित है। आदि शंकराचार्य के दर्शन के अनुसार परमात्मा एक समय में ही निर्गुण और सगुण दोनों स्वरूपों में रहता है। आठ वर्ष की उम्र में ही शंकराचार्य को चारों वेद कंठस्थ थे। आचार्य कृष्णकांत चतुर्वेदी ने आदि शंकराचार्य के अद्धैत वेंदांत दर्शन पर कहा, दुनिया के दार्शनिकों में आदि शंकराचार्य का प्रभाव दिखता है। महापौर स्वाति गोडबोले, डॉ. जितेंद्र जामदार, स्वामी परिपूर्णानंद, एडीएन बाजपेयी, डॉ. शिरीष जामदार एवं कमलताई रामदासी मौजूद थे।
शंकराचार्य की दीक्षा स्थली साकलघाट
बगलामुखी मंदिर में आदि शंकराचार्य का अभिषेक एवं सहस्त्रार्चन किया। ब्रह्मचारी स्वामी चैतन्यानंद ने कहा, सनातन धर्म को पुन: स्थापित करने के लिए आदि शंकराचार्य अवतरित हुए। नरसिंहपुर के मां नर्मदा के साकलघाट में उन्होंने गुरु गोविंदापादापाचार्य से दीक्षा प्राप्त कर साधना की। कार्यक्रम में भारत सिंह सिंह यादव, विजय कटारिया, कमलेश शास्त्री, गौरी शंकर तिवारी, ऋषि शास्त्री, तुलसी अवस्थी, मनोज सेन, राधा शुक्ला, रिचा, गीता पटेल एवं गीता गुप्ता उपस्थित थीं।
यहां भी पूजन
आचार्य परिषद मप्र के तत्वावधान में राइट टाउन में आदिशंकराचार्य का प्राकट्योत्सव मनाया गया। प्रांतीय संयोजक डॉ. एचपी तिवारी ने आदि शंकराचार्य के दर्शन पर व्याख्यान दिए। सरस्वती शिशु मंदिर उमा विद्यालय शास्त्री ब्रिज में आदि शंकराचार्य का पूजन अर्चन किया गया। इस मौके पर राघवेंद्र शुक्ला, शिक्षाविद शंकरदयाल भारद्वाज, रामबहोरी पटेल एवं चुन्नीलाल बोपचे उपस्थित थे। सरस्वती शिशु मंदिर रांझी में आचार्य यदुवेंद्र कुमार यादव, पुरूषोत्तम दत्त शर्मा, मनीष शर्मा, उमेश दुबे ने प्राकट्योत्सव मनाया।