
incense sticks made in the city
जबलपुर@ज्ञानी रजक. शहर में बनी अगरबत्ती की महक देशभर में फैलेगी। इसका उत्पादन कई गुना बढ़ाने की योजना शासन ने तैयार की है। जल्द ही अगरबत्ती क्लस्टर का निर्माण होगा। जिला प्रशासन ने इसके लिए नागपुर रोड पर ग्राम खुरसी के नजदीक करीब ढाई एकड़ जमीन चिन्हित की है। यह जमीन उद्योग विभाग के नाम हस्तांतरित होगी। फिर इसे अगरबत्ती निर्माताओं की संस्था को दिया जाएगा। 12 करोड़ रुपए से ज्यादा लागत वाली इस योजना के जरिए करीब एक हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है।
अगरबत्ती का कारोबार शहर में पहले से चल रहा है। करीब 15 बड़े उत्पादक और 100 से अधिक छोटी इकाइयां गृह उद्योग के रूप में काम कर रही हैं। इसी प्रकार एक बड़ी इकाई रिछाई औद्योगिक क्षेत्र में रॉ मटैरियल तैयार करती है। यहां बनी अगरबत्ती और रॉ मटैरियल की सप्लाई नागपुर, इंदौर, रीवा, सतना, दमोह, कटनी, सागर, रायपुर जैसी जगहों में होती है। जिले की बात करें तो रोजाना 20 से 25 टन अगरबत्ती की खपत है। वहीं देश की कुल खपत लगभग 10 लाख किलो प्रतिदिन है। इसमें देश भर में 4 लाख किलो अगरबत्ती तो बन जाती है लेकिन 6 लाख किलो के लिए चीन, इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। इसके लिए बांस की स्टिक और रॉ मटैरियल इन्हीं जगहों से आता है।
क्या होगा क्लस्टर में
प्रस्तावित अगरबत्ती क्लस्टर में बांस से बना चारकोल और उसका पावडर, वुडन पावडर और जौश पावडर तैयार किया जाएगा। वहीं जब उचित किस्म के बांस की पैदावार जिले में शुरू होगी तब स्टिक भी इसी क्लस्टर में तैयार की जाएगी। क्लस्टर के अंतर्गत प्रस्तावित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) में अगरबत्ती निर्माण के लिए 500 मशीनों की स्थापना होगी। इनके जरिए रोजाना करीब 15 हजार किलो अगरबत्ती का निर्माण किया जाएगा। इन मशीनों पर काम पर करीब 800 लोग काम करेंगे। दूसरी ओर 150 से ज्यादा लोग चारकोल, जौश पावडर जैसे दूसरे मटैरियल को तैयार करेंगे।
यह है स्थिति
- जिले में 15 बड़े और 100 से ज्यादा छोटे अगरबत्ती निर्माता।
- पांच सौ से ज्यादा लोगों को मिला हुआ है रोजगार।
- प्रदेश के जिलों के अलावा रायपुर और नागपुर तक सप्लाई।
- 12 करोड़ की लागत से क्लस्टर का निर्माण प्रस्तावित।
- प्रत्येक दिन 12 हजार किलो अगरबत्ती का उत्पादन का लक्ष्य।
आयात पर लगी है रोक
केंद्र सरकार ने देश के भीतर अगरबत्ती उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मसाला लगी अगरबत्ती की स्टिक के आयात पर रोक लगाई है। स्टिक अभी जरुरत के हिसाब से यहां नहीं बनती तो उसे विदेशों से मंगाया जा रहा है। लेकिन चीन से करीब 1 माह से इनकी सप्लाई नहीं हो रही है। कोरोना वायरस के कारण शिपिंग बंद है। इन स्थितियों को देखते हुए क्लस्टर निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।
बांस का होगा उत्पादन
जिले में क्लस्टर के निर्माण के साथ-साथ स्टिक तैयार करने के लिए विशेष प्रजाति के बांस की पैदावार भी यहीं की जानी है। इसके लिए जबलपुर के साथ-साथ छिंदवाड़ा में 100-100 एकड़ जमीन के चिन्हांकन का काम भी शुरू हो गया है। जब तक पौधे तैयार नहीं होते तब तक स्टिक का आयात जबलपुर सहित पूरे देश में होगा।
अगरबत्ती निर्माण में सामग्री की मात्रा
स्टिक 30 फीसदी
जौश पावडर 10 फीसदी
कोयला 35 फीसदी
वुडन पावडर 25 फीसदी
अगरबत्ती क्लस्टर के लिए जमीन चिन्हित की गई है। प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों के साथ जमीन का संयुक्त निरीक्षण किया गया है। शासन की प्रस्तावित योजना एवं अभिमत के साथ उद्योग संचालनालय को पत्र भेजा गया है।
देवब्रत मिश्रा, महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र
जबलपुर में अगरबत्ती क्लस्टर की बेहद संभावनाएं हैं। यहां चारकोल और उसका पावडर तथा जौश पावडर तैयार किया जाएगा। वुडन पावडर के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध है। इसी प्रकार यह क्लस्टर रोजगार का बड़ा जरिए बनेगा।
सुभाष भाटिया, अध्यक्ष, रॉ अगरबत्ती एंड एलाइड इंडस्ट्री मैन्युफैक्चरर एसो.
अगरबत्ती निर्माण के लिए रॉ मटैरियल की बहुत आवश्यकता होती है। बांस की स्टिक चीन या वियतनाम से लेनी पड़ती है। रॉ मटेरियल भी अगरबत्ती की खपत के हिसाब से नहीं मिलता। क्लस्टर बनने से यह कमी पूरी हो सकती है।
बृषाल पोपटभाई, रॉ मटैरियल निर्माता
बांस की स्टिक की हमेशा कमी रहती है। अभी बाहर से स्टिक नहीं आ रही है। ऐसें में कमी बन गई है। ऐसे में कारोबार प्रभावित हो रहा है। जिनके पास पहले से स्टॉक रखा है उन्होंने इसके दाम बढ़ा दिए हैं।
मो. हारून, अगरबत्ती निर्माता
Published on:
23 Feb 2020 12:33 pm
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