जबलपुर। रामचरित मानस में चौपाई के माध्यम से स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कलियुग केवल नाम अधारा, जिसका तात्पर्य है मंत्रजाप। मंत्रजाप से ही आप हर इच्छा को पूरी कर सकते हैं। पंडित मिथलेश द्विवेदी के अनुसार श्री यंत्र की आराध्या देवी श्री त्रिपुरा सुन्दरी देवी मानी जाती हैं। पौष मास की संक्रांति के दिन और वह भी रविवार को बना हुआ श्री यंत्र बेहद अद्भुत व सर्वोच्च फल देने वाला होता है, लेकिन ऐसा ना होने पर आप किसी भी माह की संक्रांति के दिन या शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन इस यंत्र का निर्माण कर सकते हैं। यह यंत्र ताम्रपत्र (तांबे की प्लेट), रजत-पत्र या स्वर्ण-पत्र पर ही बना होना चाहिए। श्री यंत्र की पूजा के लिए लक्ष्मीजी के बीज मंत्र "ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महालक्ष्मै नम:" का प्रयोग करें।