19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

श्री यंत्र में छिपे हैं ये कमाल, पढ़ें, अमल करें, हो जायेंगे मालामाल

श्री यंत्र की पूजा के लिए लक्ष्मीजी के बीज मंत्र का प्रयोग करें, मंत्रजाप में नियमों पालन भी आवश्यक, इस दिन बने यंत्र का करें प्रयोग

3 min read
Google source verification

image

Prem Shankar Tiwari

Jan 07, 2017

shri yantra

shri yantra

जबलपुर। रामचरित मानस में चौपाई के माध्यम से स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि कलियुग केवल नाम अधारा, जिसका तात्पर्य है मंत्रजाप। मंत्रजाप से ही आप हर इच्छा को पूरी कर सकते हैं। पंडित मिथलेश द्विवेदी के अनुसार श्री यंत्र की आराध्या देवी श्री त्रिपुरा सुन्दरी देवी मानी जाती हैं। पौष मास की संक्रांति के दिन और वह भी रविवार को बना हुआ श्री यंत्र बेहद अद्भुत व सर्वोच्च फल देने वाला होता है, लेकिन ऐसा ना होने पर आप किसी भी माह की संक्रांति के दिन या शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन इस यंत्र का निर्माण कर सकते हैं। यह यंत्र ताम्रपत्र (तांबे की प्लेट), रजत-पत्र या स्वर्ण-पत्र पर ही बना होना चाहिए। श्री यंत्र की पूजा के लिए लक्ष्मीजी के बीज मंत्र "ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महालक्ष्मै नम:" का प्रयोग करें।


यह है पौराणिक कथा

पंडित गणेश द्विवेदी के अनुसार श्रीयंत्र के प्रभाव के बारे मे एक और पौराणिक कथा है। माना जाता है कि एक बार लक्ष्मीजी पृथ्वी से दुखी होकर बैंकुठ चली गई। फलस्वरूप पृथ्वी पर अनेक समस्याएं पैदा हो गईं। तब महर्षि वशिष्ठ ने विष्णु की सहायता से लक्ष्मी को मानने के प्रयास किए, लेकिन विफल रहे। फिर वे देवगुरु बृहस्पति के मनाने पर तुरंत पृथ्वी पर लौट आईं और कहा श्रीयंत्र ही मेरा आधार है और इसमें मेरी आत्मा निवास करती है। इसलिए मुझे आना ही पड़ा। माना जाता है कि श्रीयंत्र की विधिवत पूजा करने से सुख और मोक्ष प्राप्त होता है। इसकी आराधना पूर्व दिशा की ओर मुंह रखकर करना चाहिए। तब आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी।

shri yantra

मिलता है सर्वाधिक फल

श्री यंत्र को सबसे महान और सर्वाधिक फल देने वाला यंत्र माना जाता है। कई लोग श्री यंत्र को लक्ष्मी यंत्र भी मानते हैं। धार्मिक मान्यतानुसार श्री यंत्र के पूजन से धन आगमन के रास्ते खुलते हैं। श्री यन्त्र की रचना त्रिकोण को मिला कर ही की गई हे और त्रिकोण के नीचे वाला भाग भी त्रिकोण के संयोजन से ही बना हे जो की चोकोर होता हे सभी त्रिकोण को मिला कर बात करे तो 43 त्रिकोण होते हैं और सभी त्रिकोण को 2 कमल घेरे हुए होते हे जिसमे पहला कमल अष्टदल का होता हे और दूसरा षोडशदल का होता है कमल और त्रिकोण के बीच दो वृत होते हैं।

shri yantra

यह है श्री चक्र की विशेषता

- इस यंत्र को मंदिर या तिजोरी में रखकर प्रतिदिन पूजा करने व प्रतिदिन कमलगट्टे की माला पर श्रीसूक्त के 12 पाठ के जाप करने से लक्ष्मी प्रसन्न रहती है।
- श्री यंत्र ही एक अकेला साधन है लक्ष्मी जी को आकर्षित करने का श्री यंत्र से आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी हो जाती है और सारी परेशानियां दूर हो जाती है।
- जन्मकुंडली में मौजूद विभिन्न कुयोग श्रीयंत्र की नियमित पूजा से दूर हो जाते हैं।
- इसकी कृपा से मनुष्य को अष्टसिद्घियां और नौ निधियों की प्राप्ति होती है।
- श्रीयंत्र के पूजन से रोगों का नाश होता है।
- इस यंत्र की पूजा से मनुष्य को धन, समृद्घि, यश, कीर्ति की प्राप्ति होती है।
- रुके कार्य बनने लगते हैं। व्यापार की रुकावट खत्म होती है।
- श्री यंत्र साधना से संसार में कुछ भी दुलज़्भ नहीं रह जाता है।