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गाय ने लिए बैल संग फेरे, यहां कराई गई अनोखी शादी, ये वजह बताई: देखें वीडियो

गाय ने लिए बैल संग फेरे, यहां कराई गई अनोखी शादी, ये वजह बताई: देखें वीडियो  

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amazing cow wedding in jabalpur madhya pradesh, see wedding video

jabalpur/ जबलपुर नगर में धूमधाम से हुआ बच्चियां और बछड़े का विवाह। कर्मकांड की भाषा में इसे वृषोत्सर्ग कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि वृषोत्सर्ग करने से पितर प्रसन्न होते हैं। 10 पीढ़ी तक के पितरों को प्रसन्नता प्राप्त होती है। यह रस्म वर वधु के विवाह की तरह ही निभाई जाती है। इसमें मंडप बनाकर हल्दी और सात फेरों की रस्म निभाई जाती है यह कार्य पंडित अखिलेश त्रिपाठी और उनकी पत्नी किरण त्रिपाठी के संयोजन में संपन्न हुआ। महाभारत अनुशासन पर्व के दानधर्म पर्व के अंतर्गत अध्याय 125 में वृषोत्सर्ग आदि के विषय में देवताओं, ऋषियों और पितरों के संवाद का वर्णन हुआ है।

देवताओं एवं ऋषियों द्वारा पितरों से प्रश्न पूछना

वैशम्पायन जी कहते हैं जनमेजय! भीष्म जी ने कहा- युधिष्ठिर तब मरुद्गणों सहित सम्‍पूर्ण महाभाग देवता और परम सौभाग्‍यशाली ऋषियों ने पितरों से पूछा- मनुष्‍यों की बुद्धि थोड़ी होती है- ; अत: वे कौन-सा कर्म करें, जिससे आप सम्‍पूर्ण पितर उनके ऊपर संतुष्‍ट होगें? श्राद्ध में दिया हुआ दान किस प्रकार अक्षय हो सकता है? अथवा मनुष्‍य किस कर्म से किस प्रकार पितरों के ऋण से छुटकारा पा सकते हैं? हम यह सुनना चाहते हैं। यह सब सुनने के लिये हमारे मन में बड़ी उत्‍कंठा है’।

वृषोत्सर्ग आदि के विषय में पितरों का संवाद

पितरों ने कहा- मुने! छोड़े हुये नीले रंग के सॉंड़ की पूँछ यदि नदी आदि के जल में भीगकर उस जल को ऊपर उछालती है तो जिसने उस सॉंड़ को छोड़ा है उसके पितर साठ हजार वर्षों तक उस जल से तृप्‍त रहते हैं। जो नदी या तालाब के तट से अपने सींगों द्वारा कीचड़ उछालकर खड़ा होता है, उससे वृषोत्‍सर्ग करने वाले के पितर निसंदेह चन्‍द्रलोक में जाते हैं। वर्षा-ऋतु में दीन दान करने से मनुष्‍य चन्‍द्रमा के समान शोभा पाता है। जो दीपदान करता है, उसके लिये नरक का अन्‍धकार है ही नहीं। तपोधन! जो मनुष्‍य अमावस्‍या के दिन ताँबें के पात्र में मधु एवं तिल से मिश्रित जल लेकर उसके द्वारा पितरों का तपर्ण करते हैं, उनके द्वारा रहस्‍य सहित श्राद्धकर्म यथार्थ रूप से समपादित हो जाता है। उनकी प्रजा सदा ह्ष्‍ट-पुष्‍ट मन वाली होती है। कुल और वंश-परम्‍परा की वृद्धि श्राद्ध का फल है। पिण्‍डदान करने वाले को यह फल सुलभ होता है। जो श्रद्धापूर्वक पितरों का श्राद्ध करता है, वह उनके ऋण से छुटकारा पा जाता है। इस प्रकार यह श्राद्ध के काल, क्रम, विधि पात्र और फल का यथावत रूप से वर्णन किया गया है।