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गजब की रोड इंजीनियरिंग, मकान बनाया तो सडक़ दो फीट नीचे थी, अब मकान हो गया नीचे

गजब की रोड इंजीनियरिंग, मकान बनाया तो सडक़ दो फीट नीचे थी, अब मकान हो गया नीचे  

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road construction

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मनीष गर्ग@जबलपुर। सडक़ निर्माण में तकनीकि पहलुओं का ध्यान नहीं रखने के कारण शहर के कई क्षेत्रो में हालत यह हो गए हैं कि कई क्षेत्रों में सडक़ ऊंची हो गई। घर नीचे हो गए हैं। इससे बरसात में क्षेत्र के रहवासियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं हाल ही में जो नई कांक्रीट की सडक़ बनाई जा रही है वह भी पुरानी लेयर के उपर से ही एक से सवा फिट तक ऊंची बनाई जा रही है।

लापरवाही - शहर के कई क्षेत्रों में मकान नीचे, सडक़ ऊंची
दो दशक में दो फीट ऊंची हो गईं सडक़ें, जलभराव का मंडराया खतरा

शहर में 2001 के बाद से अधिकतर स्थानों पर सीमेंटेंड सडक़ निर्माण किया जा रहा है। सीमेंट सडक़ एक बार से दूसरी बार निर्मित होने पर समस्या यह हो रही है। सडक़ ऊंची और घर नीचे हो जा रहे हैं। इससे क्षेत्र का डे्नेज सिस्टम भी बिगड़ रहा है।

IMAGE CREDIT: patrika

स्मार्ट सिटी के काम की भी यही स्थिति
शहर के गोलबाजार में भी सीमेंट सडक़ का निर्माण किया जा रहा है। रानीताल चौराहे से गोलबाजार जाने वाली सडक़ में पुरानी सडक़ के उपर ही एक फिट ऊंची लेयर चढ़ाकर सडक़ निर्माण किया जा रहा है। हलांकि इस निर्माण में जिम्मेदार तर्क दे रहे हैं कि नाली को भी ऊंचा किया गया है परंतु विशेषज्ञ बताते हैं कि आने वाले समय में यहां भी जलभराव की स्थिति होगी।

दो से तीन फिट हो गई नीचे
माढ़ोताल से दीनदयाल चौक के बीच आईटीआई के सामने तो सडक़ इतनी ऊंची हो गई कि यहां पर तीन फिट नीचे दुकान-मकान हो गए। शिवनगर साई मंदिर से वत्सला पैराडाज तक जो नई सीमेंटेंड सडक़ बनी है। वहां भी यही स्थिति है। अधारताल की पुरानी कॉलोनीयों में भी यही स्थिति है।

इन क्षेत्रों में ज्यादा समस्या
शहर की अधिकांश क्षेत्रों में यह स्थिति निर्मित हो गई है और लोग अब अपने घरों को तोड़ कर या तो नया बना रहे हैं। बाउंड्री वाल व सामने का कमरा ऊंचा कर रहे हैं। राइट टाउन, नेपियर टाउन,मदनमहल आमनपुर का क्षेत्र, चेरीताल,स्टेट बैंक कॉलोनी, ङ्क्षसगल स्टोरी, संगम कॉलोनी, आनंद कालोनी, जानकी नगर, शांति नगर, दमोहनाका, अधारताल, रद्दी चौकी,गढ़ा , 90 क्वार्टर बाजनामठ, त्रिमूर्ति नगर सहित अधिकांश क्षेत्र, स्नेह नगर,रांझी, माढ़ोताल, आईटीआई रोड सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। यहां अब लोग घरों में नए निर्माण कर रहे हैं।

सडक़ निर्माण में मानकों का ध्यान रखा जाता है। निर्माण के समय अपग्रेडेशन होता है। जिसमें डामर सडक़ चार से छ: इंच तक उंची होती है। ेडामर सडक़ तीन से पांच साल तक चलती है जबकि सीमेंट सडक़ लम्बे समय तक रहती है। सीमेंट सडक़ में ऊपर से लेयर इसलिए चढ़ा दी जाती है की उसका स्ट्रक्चर मजबूत रहता है। सडक़ निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है कि ड्रेनेज सिस्टम प्रभावित नहीं हो। सडक़ पर किसी भी स्थिति में जलभराव नहीं हो इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए।
- आर के गुप्ता, इंजीनियर नगर निगम जबलपुर

यातायात के दवाब को ध्यान में रखकर सडक़ निर्माण किया जाता है परंतु सडक़ बनाते समय उसकी डिजाइन में इस बात का भी ध्यान रखा जाता है कि व्यवहारिक समस्या नहीं हो। जिस सीमेंट सडक़ के उपर एक फिट की लेयर चढ़ा कर सडक़ निर्माण किया जा रहा है उसका बेस भी पहले देखकर माइनस स्ट्रक्चर करना चाहिए। मानकों का पालन आवश्यक है।
- पुरषोत्तम तिवारी, सेवानिवृत्त इंजीनियर नगर निगम

शहर के ऐसे क्षेत्र जहां पर पुराने मकान है वहां पर सडक़ निर्माण के दौरान तकनीकि पहलुओं का रखकर निर्माण किया जाना जाना चाहिए। विधानसभा क्षेत्र में सडक़ निर्माण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए जाते हैं कि पहले सर्वे करें। यदि जलभराव की स्थिति है तो और लोगों के घर नीचे हो रहे हैं तो वहां सीमेंट की जगह डामर सडक़ बनाएं। इसमें भी आवश्यकता पडऩे पर खुदाई करके लेबल मिला कर सडक़ बनाएं।
- विनय सक्सेना, विधायक, मध्य क्षेत्र